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Showing posts from October, 2018

तआल्लुक़ इतना तो था।

मुहब्बत ना थी मगर ताआल्लुक़ इतना तो था, हँसकर कभी हमसे बात वो करता तो था! मेरी जान था वो, मैं उसे सितमगर नही कहता, और ये भी बात सच के वो बेवफा तो था, ये बात और के अब ताल्लुक़ भी नही उसस...

Na मालूम

मेरे जुनु का नतीजा ज़रूर निकलेगा इसी सियाह समुन्दर से नूर निकलेगा गिरा दिया है जो साहिल पर इंतज़ार ना कर अगर वो डूब गया तो दूर निकलेगा उसी का सहर वही मुद्दई वही मुंसिफ हमें यक...

उम्र गुज़र जाती हैं

उम्र   गुज़र जाती  हैं सँवरने में, जिंदगी में  कुछ  नया करने में! कहाँ  हैं  वो मज़ा जीने में यारो, जो  लुत्फ़  हैं  वतन पे मरने में! शायरी लिखना कोई खेल नही, उम्र  बीत  जाती हैं नि...