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Showing posts with the label हकपरस्ती शायरी

मयस्सर कहाँ है....

मयस्सर कहाँ हैं सूरते-हमवार देखना, तमन्ना हैं दिल की बस एक बार देखना! किसी भी सूरत वो बख्शा ना जायेगा, गर्दन पे चलेगी हैवान के तलवार देखना! सज़ा ए मौत को जिनकी मुत्ताहिद हुए है...

इन्साफ कब होगा।

बादशाह ओ औलिया को ढूंढता हूँ मैं, हकपरस्त ए हुक़ुमरां को ढूंढता हूँ  मैं! दयारे-नसीम-ऐ-कानून हर सू चले, ऐसी  ही चमन ए फ़िज़ा ढूंढता हूँ मैं! वकारे-सू-ए-दारे-अहले-सिपाही, औरंगज़ेब  अ...