दुनिया की सियासत में कभी-कभी एक बयान ऐसा आता है जो पूरे बयानिये (Narrative) को हिला देता है। हालिया दिनों में कुछ ऐसा ही मंजर तब देखने को मिला जब Tulsi Gabbard की गवाही ने वॉशिंगटन के गलियारों में एक नई बहस को जन्म दे दिया। यह महज़ एक इत्तिला (Information) नहीं थी, बल्कि उस तर्क की जड़ को छूती हुई बात थी, जिस पर पूरी जंग का जواز (Justification) खड़ा किया गया था। गवाही के मुताबिक़, 2025 में हुए हमलों के बाद ईरान ने अपने न्यूक्लियर एनरिचमेंट (Nuclear Enrichment – परमाणु संवर्धन) प्रोग्राम को दोबारा शुरू करने की कोई कोशिश नहीं की। यहाँ तक कहा गया कि “ऑपरेशन मिडनाइट हैमर” (Operation Midnight Hammer) के बाद यह प्रोग्राम इस कदर तबाह हो चुका था कि उसकी बहाली की कोई ठोस निशानी सामने नहीं आई। अब सवाल यह उठता है कि अगर ख़तरा मौजूद ही नहीं था, तो फिर उस ख़तरे के नाम पर जंग क्यों छेड़ी गई? Donald Trump और उनके इदारे (Administration) लगातार यह कहते रहे कि ईरान की परमाणु महत्वाकांक्षा (Nuclear Ambition) एक बड़ा ख़तरा है, और इसे रोकने के लिए फौजी कार्रवाई ज़रूरी थी। मगर जब इंटेलिजेंस (Intelligence – ...
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