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Sab Log To....

सब लोग तो मैखाने में जाकर पीते है, हम जहाँ बैठ के पीये वहीं मैख़ाना बने! तारिक़ अज़ीम 'तनहा'

Jinke Kadmo...

जिनके कदमो को आदत हैं लड़खड़ाने की वो जुर्रत ना करे हमसे नज़रे मिलाने की

तू अगर....

!!.."तू अगर सँभालने का वादा करले मुझसे"..!! . . !!.."मैं हज़ार बार पीकर बहक जाउ ऐसे ही"..!! Must like our poetry Page https://m.facebook.com/tariqazeemtanhaofficial/

इन्साफ कब होगा।

बादशाह ओ औलिया को ढूंढता हूँ मैं, हकपरस्त ए हुक़ुमरां को ढूंढता हूँ  मैं! दयारे-नसीम-ऐ-कानून हर सू चले, ऐसी  ही चमन ए फ़िज़ा ढूंढता हूँ मैं! वकारे-सू-ए-दारे-अहले-सिपाही, औरंगज़ेब  अ...

चंद अश्आर

(1) मैदाने-हश्र को भूल गए हम मसरूफ होकर, इस जिंदगी को ऐसे मसरूफ़ होकर ना गुज़ारो! (2) अब अपने कदमो पे भी यकीन ना रहा मुझे, उतरा हूँ आज सीढ़ियों से तो दीवार का सहारा लेकर! (3) मिरी दास्ताने-म...