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सियासत का खेल या इंसानियत का फ़रेब: जंग, नफ़ा और खामोश ज़मीर की दास्तान

अगर तुकबंदी में कहा जाए तो मंजर कुछ यूँ है चिराग़ नहीं, यहाँ सियासत का धुआँ है, हर फैसला इंसानियत नहीं, मुफ़ाद का कुआँ है। दुनिया की सियासत (Politics) में अक्सर एक ख़याल परोसा जाता है कि कुछ ममालिक (Countries) ऐसे हैं जो चाहें तो जंग रोक सकते हैं, बस इशारा करें और बारूद की बू ख़त्म हो जाए। मगर जब हक़ीक़त की ज़मीन पर कदम रखा जाता है, तो यह ख्वाब एक तिलिस्म (Illusion) से ज़्यादा कुछ नहीं लगता। यह कहना आसान है कि फलाँ मुल्क जंग रुकवा सकता है, मगर सवाल यह है कि क्या उसके पास वाक़ई वह इख़्तियार (Authority) है, या सिर्फ़ एक सियासी तसव्वुर (Perception) है जो लोगों के ज़हन में बिठा दिया गया है? जब एक मुल्क अपनी मआशियाती (Economic) ज़रूरतों में भी मुकम्मल ख़ुदमुख़्तारी (Autonomy) हासिल नहीं कर पाता, तो वह आलमी जंग के फैसलों पर किस हद तक असरअंदाज़ हो सकता है यह सवाल अपने आप में बहुत कुछ बयान कर देता है। असल में मसला ताक़त का कम और तरजीहात (Priorities) का ज़्यादा है। जब तक आग दूर जलती है, वह सिर्फ़ एक मंजर होती है लोग उसे देखते हैं, उस पर बहस करते हैं, और कभी-कभी तो उस पर जश्न भी मनाते हैं। मगर ज...

मशरिक़-ए-वुसता की सुलगती जंग: ताक़त, सियासत और इंसानियत का इम्तिहान

इज़राइल ने जंग में हुए नुक़सान की मीडिया कवरेज पर सख़्त पाबंदी आइद कर दी है। कहा जा रहा है कि तेल अवीव, यरूशलेम और पूरे इज़राइल में ईरानी मिसाइलों से होने वाली तबाही की वीडियोग्राफ़ी और तस्वीरें लेने पर सख़्त रोक लगा दी गई है। यहाँ तक कि इन वीडियोज़ और तस्वीरों को इज़राइल से बाहर भेजने पर भी सख़्त क़िस्म की मनाही कर दी गई है। हुकूमत का कहना है कि इससे मुल्क की सिक्योरिटी और फ़ौजी मुक़ामात से जुड़ी मालूमात दुश्मनों तक पहुँच सकती है, इसलिए ऐसी रिपोर्टिंग पर पाबंदी ज़रूरी समझी गई। दूसरी तरफ़ अमरीका और इज़राइल लगातार यह दावा कर रहे हैं कि उनके हमलों से ईरान को बहुत बड़ा नुक़सान पहुँचा है। मगर अगर वाक़ई ईरान इतनी बुरी तरह तबाह हो चुका है तो फिर वह हथियार क्यों नहीं डाल रहा? जो अमरीका जंग के आग़ाज़ में यह कह रहा था कि सिर्फ़ 48 घंटों में ईरान में हुकूमत तब्दील हो सकती है, अब उस जंग को बारह दिन से ज़्यादा गुज़र चुके हैं और हालात अब भी नाज़ुक बने हुए हैं। ईरानी क़ियादत किसी क़िस्म के मुआहिदे या समझौते के लिए तैयार नज़र नहीं आती। कई तजज़ियाकार यह सवाल भी उठा रहे हैं कि कहीं इज़राइल के साथ खड़...

आज की रात क्यों बताई जा रही है ‘कयामत की रात’?

अभी तक ईरान ने बहरीन,यूएई,जॉर्डन सहित तीन अमेरिकी बेस के वायुरक्षा प्रणाली अर्थात "Thad" उड़ा दिए जिसको स्थापित करने में 4 दशक व अरबों डॉलर लगे है। ईरान ने खाड़ी देशों में स्थित सैन्य ठिकानों को भारी नुकसान पहुंचाया है।ईरानी हमलों में इजरायल का तेल-अवीव शहर खंडहर में तब्दील हो चुका है। अब तक चले युद्ध मे अमेरिका व इजरायल को ईरान के मुकाबले भारी नुकसान हुआ है।अमेरिका व इजरायल ईरान में नागरिक ठिकानों पर नुकसान कर पा रहे है लेकिन ईरानी मिसाइल सिस्टम व ड्रोन स्टोरेज पर हमला नहीं कर पा रहे है। दरअसल ईरान को पता था कि अमेरिका-इजरायल हमला जरूर करेंगे इसलिए 3 दशक से उसी अनुरूप तैयारी कर रहा था।सारा मिसाइल सिस्टम अंडरग्राउंड, सारा ड्रोन सिस्टम अंडरग्राउंड बनाया हुआ है जिसकी जानकारी सिर्फ ईरान के सैन्य कमांडर्स को है। ईरान ने जमीन पर जगह-जगह 3D पेंटिंग द्वारा एयरक्राफ्ट स्टेशन, रनवे, युद्धक जहाज इस तरह बनाये है कि एकबारगी नजदीक से देखने पर वास्तविक लगते है।इस तरह की टैक्टिक सामने वाले का युद्धक साजो-सामान बर्बाद करने के लिए बनाए गए है। जगह-जगह बैलून टैंक, फाइटर जहाज, मिसाइल्स...