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Does God Exist 4

मेरी नज़र में हाल में हुई नास्तिक–आस्तिक बहस, जिसमें Javed Akhtar और एक मौलवी आमने–सामने थे, उसे “जीत–हार” की तरह देखना ही मूल समस्या है। असली प्रश्न यह है कि कौन-सी सोच इंसान को इंसान बनाती है और कौन-सी सोच उसे भीड़ में बदल देती है। आज जिस आस्तिकता का सबसे ज़्यादा प्रचार है, वह ज़्यादातर religion-based आस्तिकता है—जो कठोर है, डर पर टिकी है और आदेश–पालन को ही धर्म मानती है। यही वह सोच है जिसने इतिहास में सबसे ज़्यादा हिंसा को जन्म दिया। धर्म के नाम पर क़त्लेआम, अलगाव और नफ़रत इसी मानसिकता की उपज हैं। इसके ठीक उलट, spirituality (आध्यात्मिकता) प्रेम, दया और करुणा के माध्यम से ईश्वर तक पहुँचने की बात करती है। आध्यात्मिक दृष्टि कहती है कि ईश्वर बाहर नहीं, हर जीव के भीतर है। जब ईश्वर हर प्राणी में है, तो किसी को कष्ट देना, किसी की हत्या करना—ईश्वर से दूरी नहीं तो और क्या है? यही कारण है कि दुनिया के सच्चे आध्यात्मिक संत हमेशा सत्ता और धर्मसत्ता की आँखों में खटकते रहे। Kabir ने कहा—“कंकर-पाथर जोड़ि के मस्जिद लई बनाय”—तो पंडित भी नाराज़ हुए और मुल्ला भी। Gautama Buddha ने कर्मकांड, यज्ञ और जा...

Does God Exist ३

क्या किसी सवाल का इमोशनल होना किसी सवाल के इररैशनल होने की दलील है?? किसी इंसान का किसी दूसरे इंसान को दुख मे देखकर दुखी होना इमोशन ही है जो इंसान मे ज़ाहिर होता है।  कयी दफ़ा किसी सवाल का जवाब इतना सिंपल और ब्रूटल होता है कि उससे बचने के लिये बड़ी बड़ी थ्योरीज़ बनायी जाती हैं और इन थ्योरीज़ मे शामिल भारी भारी अल्फ़ाज़ के जाले मे वह निहायत सिंपल सवाल किसी छोटे से कीड़े की तरह फंस कर दम तोड़ देता है। लेकिन दम तोड़ता है ख़त्म नही होता जैसे कोई भी जानदार मर जाने के बाद भी लाश की सूरत मे मौजूद रहता है। दुनिया को एक बात समझनी होगी। जब तक कहीं कोई मज़लूम बेकसी से मरेगा, जब तक ऐसे क़हत  पड़ेंगे जिनमे लोग लाशो को खाने पर मजबूर होते रहेंगे तब तक कुछ सवाल इमोशन्स से ही होगे  क्योकि किसी को दुख मे देखकर दुखी होना इमोशन है ना कि फ़िज़िक्स।  इसी बात का दूसरा पहलू यह है कि जब तक इस दुनिया इंसान इतना मजबूर रहेगा कि उसके पास किसी ग़ैबी मदद की उमीद के सिवा कोई चारा नही होगा तब तक कोई कितना ही शोर मचाले इंसान का किसी अनदेखी ताकत मे यकीन ख़त्म नही होगा।  बाकी इस बहस से किसी को क्य...

Does God Exist क्या खुदा का कोई वजूद है?

जब हम दुनिया को देखते हैं, तो हमें बहुत-सी चीज़ें नज़र आती हैं, इंसान, पेड़, जानवर, पहाड़, सितारे, लेकिन दार्शनिक लोग चीज़ों को सिर्फ़ देखते नहीं, बल्कि यह पूछते हैं कि ये हैं ही क्यों ??? इब्ने सीना ने भी यही सवाल उठाया, और फिर उसका जवाब ढूंढने के क्रम में इब्ने सीना ने existence को तीन भागों में बाँटा, 1 - Impossible Being (ممتنع الوجود) 2 - Contingent Being (ممکن الوجود) 3 - Necessary Being (واجب الوجود) अब प्रश्न उठता है ये Impossible Being क्या होता है? कुछ चीज़ें ऐसी होती हैं जिनका होना ही possible नहीं होता, जैसे... चौकोर वृत्त (square circle), शादीशुदा कुंवारा (married bachelor), इन चीज़ों में खुद ही contradiction है, क्योंकि कोई चौकोर चीज़ गोल नहीं हो सकती, कोई शादी शुदा व्यक्ति कुंवारा नहीं हो सकता, इनका न होना पूरी तरह clear है, इब्ने सीना ऐसी चीज़ों को कहते हैं Impossible Being (Mumtani‘ al-Wujood), यानी जो exist ही नहीं कर सकती, जिनके बारे में सोच भी लेना logical गलती है, अब हम अपने आसपास देखें, आप exist करते हैं, मैं exist करता हूँ, ये धरती और आसमान exist करते हैं, लेकिन ...

Does God Exist | Javed Akhter | Mufti Shamail - Lallantop

जावेद अख़्तर साहब के फैंस क्लब को जोर का झटका लगा है। इन्हें अपने मठाधीश की ऐसी दुर्गति की उम्मीद नहीं थी। मिथुन के फैंस मिथुन को पिटता हुआ नहीं देख सकते।  जिस प्रकार जावेद साहब पूरी डिबेट में दाएं बाएं की बाते करते रहे वैसे ही ये लोग भी कर रहे हैं। इनको लगा था अंसार रज़ा जैसा कोई 5 हजारी डिबेट करने आएगा जिसे जावेद साहब भिगोकर, फिर धो पटककर और अंत में निचोड़कर सूखा देंगे। लेकिन उल्टा हो गया। कमेंट्री करना और मैदान में उतरकर खेलना दोनो बातों में अंतर है। जावेद साहब इतने समय तक कमेंट्री कर रहे थे। एक मंच मिल जाता था जिसपर चढ़कर माइक पकड़ा हाथ मे और अपनी सुंदर शैली में कुछ भी बोलो बदले में सुनो तालियों की गड़गड़ाहट। उसमें आपसे क्रॉस क्वेश्चन करने वाला और आपके सवाल का जवाब देने वाला नहीं होता है। सिर्फ सुनने वाले लोग होते हैं। बड़ा ही आसान और मज़ेदार काम है।  जावेद साहब के पास दो तरह के फैंस क्लब है। एक तो उनके लॉजिक का फैन और एक है उनके गीत उनकी रचनाओं का फैन.. गीत ग़ज़ल के फैंस पता नहीं कहाँ गए, लॉजिक के फैंस बड़ी संख्या में नज़र आ रहे हैं जो कल की डिबेट के बाद बौखलाए से शिकस्त महसूस किये घू...