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अजब-गजब भारतीय

1 भारतीय ने जॉब छोड़कर कनाडा के 1 बड़े डिपार्टमेंटल स्टोर में सेल्समेन की नोकरी ज्वाइन की। बॉस ने पूछा- तुम्हे कुछ तज़ुर्बा है? उसने कहा कि हा थोड़ा बहुत है  पहले दिन उस भारतीय ने पूरा मन लगाकर काम किया। शाम के 6 बजे बॉस ने पूछा:- आज पहले दिन तुमने कितने सेल किये? भारतीय ने कहा कि सर मैंने 1 सेल किया। बॉस चौंककर बोले:- क्या मात्र 1 ही सेल। सामान्यत: यहाँ कार्य करने वाले हर सेल्समेन 20 से 30 सेल रोज़ाना करते हैं। अच्छा ये बताओं तुमने कितने रूपये का सेल किया। 93300 पाउंड्स। भारतीय बोला। क्या!  लेकिन तुमने यह कैसे किया? आश्चर्यजनक रूप से बॉस ने पूछा। भारतीय ने कहा:- 1 व्यक्ति आया और मैंने उसे एक छोटा मछली पकड़ने का हुक बेचा। फिर एक मझोला और फिर अंततः एक बड़ा हुक बेचा। फिर उसे मैंने 1 बड़ी फिशिंग रॉड और कुछ फिशिंग गियर बेचे। फिर मैंने उससे पूछा कि तुम कहा मछली पकड़ोगे और उसने कहा कि वह कोस्टल एरिया में पकड़ेगा।  तब मैंने कहा कि इसके लिए 1 नाव की ज़रूरत पड़ेगी। अतः मैं उसे नीचे बोट डिपार्टमेंट में ले गया और उसे 20 फीट की डबल इंजन वाली स्कूनर बोट बेच दी। जब उसने कहा कि यह बोट उस...

13 अगस्त मुरादाबाद दंगा | इंदिरा गांधी | नरेंद्र मोदी

नोट- ये जितनी भी बातें मैंनें लिखी है ये मुझे एक ट्रैन यात्रा के दौरान किसी प्रोफेसर ने बताई थी, वह व्यक्ति मुझे धार्मिक के साथ व्यक्तिगत तौर भी खरा इंसान लगा था, मुझे (यानी तारिक़ अज़ीम 'तनहा' को) आगरा घूमने जाना था सफ़र लंबा था, कुछ उस व्यक्ति ने मुझे बात बताई कुछ मैंनें उसे अपने किस्से सुनाये लेकिन उसने एक अपनी ज़िंदगी से जुड़ा हुआ किस्सा ऐसा सुनाया की जिसे सुनाते हुए वह व्यक्ति बहुत रोया और आज 1947 से आज तक हो रहे एलेक्शन्स में वोट बैंक कैसे बनाया जाता है उसे सुनकर मैं आश्चर्यचकित रह गया। चूंकि मैं एक शायर और लेखक भी हूँ तो मैंनें उस दिन को जस के तस आपके सामने रख दिया है, आप यह उसकी जिंदगी से जुड़ा हुआ किस्सा पढ़िए। 13 अगस्त 1980 तारीख़ का वो दिन है, जिसे भूल पाना मुश्किल है, ये वो दिन था जब #मुरादाबाद ईदगाह में सैकड़ों #नमाज़ियों को गोलियों से भून दिया गया था, ये अलग बात है कि आज उसकी बरसी है और सोशल मीडिया पर सन्नाटा है, इस नरसंहार पर खामोशी की सबसे बड़ी वजह शायद आपको मालूम ना हो, लेकिन इस खामोशी की सबसे बड़ी वजह ये है कि ये नरसंहार बाक़ायदा #कांग्रेस की देखरेख में हुआ था, और ये कोई ह...

Bachpan Ka Pyaar | Baashah | Bhool Nahi Jana Re

विचारणीय विषय  आइकन्स.... आज की तारीख तक चाइना 38 गोल्ड के साथ 87 मेडल लेकर शीर्ष पर है। अमेरिका 36 गोल्ड सहित 108 मेडल के साथ द्वितीय, जापान 27 गोल्ड 56 मेडल के साथ तीसरा और ब्रिटेन 20 गोल्ड 63 के साथ पाचवे ऑस्ट्रेलिया 17 गोल्ड 46 मेडल लेकर छठे नम्बर पर है और भारत 1 गोल्ड 2 सिल्वर, 4 ब्रांज के साथ 7 मेडल लेकर 47 स्थान पर है। और हमारे यहां ट्रेंड कर रहा है "जानू मेरी जानेमन बचपन का प्यार मेरा भूल न जाना रे।" एक मुख्यमंत्री उस बच्चे से मिलकर उसे सुपरस्टार का दर्जा दे रहा है। मानो वह टोक्यो से गोल्ड ले आया हो। इसमें गलती उस बच्चे की भी नहीं है, वह तो बस एक मोहरा भर है। इसके पीछे पूरी एक टीम लगी होगी, जो जबर्दस्ती उसे सुपरस्टार बनाने पर तुली है। ताकि उसे बच्चों का आइडल बनाया जा सके। क्योंकि आजकल हर बच्चे के हाथ स्मार्टफोन है। स्कूल बंद हैं सो भरपूर टाइम भी है। जिस उम्र में चीन, अमेरिका, थाई, मलेशियाई बच्चे स्पोर्ट स्कूल में दाखिला लेकर अपने गोल्ड वाले सपने की तरफ पहला कदम बढ़ाते हैं। उस उम्र है हमारे बच्चे आजकल टिकटोक टाइप वीडियो बनाना सीख रहे हैं। पुनः कहूंगा गलती उनकी नहीं बल्क...