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Showing posts with the label Alone Poet

तुझे भी हूरो-गिलमा

चेहरे पर हँसी हैं, मगर बेज़ार हैं तू क्यों, लहज़ा संग दिल,कभी तलवार हैं तू क्यों! हिज़रते-आशियाँ ओ सफ़र-ए-जिंदगी, वक़्त -ए -हिज़्र  में     बेदार  हैं तू  क्यों! तू छोड़ गए तुझ को गर्दिश- ऐ...

नज़र से मुझको....

नज़र से मुझको पिला दे साकी, नज़र मिरी तरफ उठा दे साकी! होगी कई शीशे की मय नज़र में, जानूंगा गर इनमे डूबा दे साकी! रंजो-गम का हैं बोझ  दिल पर, अलम मिरे सारे मिटा दे साकी! झगड़ो से कुछ भी न...

हुस्ने-जमीं

जमीं का हुस्न भी आफताब से हैं, तजल्ली है तो शादाब है आलम! आफ़ताब-सूरज तजल्ली-रौशनी शादाब-हरा-भरा, हरियाली आलम-जहाँ, दुनिया, दयार, संसार    तनहा शायर