ईरान पर हमले के दस दिन बाद अब सूरत-ए-हाल ख़ौफ़नाक होती जा रही है। बाज़ार पर एक अजीब सा ख़ौफ़ तारी है। जिस सेन्सेक्स और निफ्टी को Donald Trump के टैरिफ़ भी डेढ़ साल में ज़्यादा हिला न सके, उसी बाज़ार को इस जंग ने सिर्फ़ एक हफ़्ते में हिला कर रख दिया। जंग से पहले अगर कोई कहता कि निफ्टी 24000 से नीचे जाएगा तो लोग उसे दीवाना समझते, मगर आज निफ्टी उस सतह से नीचे जा चुका है और किसी को हैरत भी नहीं हो रही। रिज़र्व बैंक रुपया सँभालने में मुश्किल महसूस कर रहा है और सुबह-सुबह ही रुपया अपनी नई पस्त-तरीन सतह पर पहुँच गया। कच्चा तेल (Crude Oil) जो कभी 100 डॉलर पर पहुँचने को कोह-ए-एवरेस्ट समझा जाता था, आज आराम से 120 डॉलर के क़रीब पहुँच चुका है। हिसाब कहता है कि अगर कच्चा तेल एक डॉलर भी महँगा हो जाए तो भारत के आयाती बिल में लगभग 16 हज़ार करोड़ रुपये का इज़ाफ़ा हो जाता है। सोचिए जब तेल 65–70 डॉलर से बढ़कर 120 डॉलर तक पहुँच गया है तो इसका असर कितना संगीन होगा। अगर ये जंग एक महीना और जारी रहती है, तो शदीद महँगाई और ज़रूरी अशिया की किल्लत से इंकार नहीं किया जा सकता। ईरान के रहबर-ए-आला Ali Kha...
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