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ज़बान, तहज़ीब और जुग़राफ़िया: अल्फ़ाज़ का सफ़र और इंसानी शऊर की हक़ीक़त

दुनिया की तारीख़ को अगर किसी एक आइने में देखा जाए तो वो ज़बान है वही ज़बान जो इंसान की तहज़ीब (Culture) की रूह है, वही ज़बान जो जुग़राफ़िया (Geography) की परछाईं है। इंसान जहाँ बसता है, वहीं उसके अल्फ़ाज़ जन्म लेते हैं; जहाँ दरिया बहते हैं, वहाँ लफ़्ज़ भी रवाँ होते हैं; जहाँ रेगिस्तान है, वहाँ ताबिश (Heat) के सैंकड़ों इज़हार मिलते हैं, और जहाँ बर्फ़ की दुनिया है, वहाँ सरदी के रंग बेशुमार होते हैं। तारीख़ गवाह है कि इंसान ने जब पहली मर्तबा अपनी ज़िंदगी को तशकील दी, तो दरिया-ए-दजला और फरात के किनारों पर दी। यही वो मक़ाम था जहाँ बशर (Human) ने ख़ाना-बदोशी (Nomadism) छोड़कर स्थायित्व (Settlement) अपनाया। इसी सरज़मीन ने तहज़ीब को जन्म दिया और ज़बान को शक्ल दी। यही वजह है कि दरियाओं के नाम, पहाड़ों के नाम, समंदरों के नाम हर एक में उस इलाक़े की पहचान, उसकी रूह और उसकी तारीख़ समाई होती है। अगर हम दुनिया के मुख़्तलिफ़ इलाक़ों पर नज़र डालें, तो हर ज़बान अपने माहौल का अक्स (Reflection) नज़र आती है। अरब के सहरा (Desert) में गर्मी के लिए दर्जनों अल्फ़ाज़ मिलते हैं, लेकिन बर्फ़ के लिए बहुत कम; वहीं ...
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“समुंद्री केबल्स का ख़तरा: क्या ईरान आलमी इंटरनेट निज़ाम (Global Internet System) को मुअत्तल (Disrupt) कर सकता है?”

आज की दुनिया में जंग (War) सिर्फ़ मिसाइल (Missiles) और टैंक (Tanks) तक महदूद नहीं रही, बल्कि यह एक ऐसे मुकाम (Stage) पर पहुँच चुकी है जहाँ असल जंग नजरों से ओझल (Invisible) ढांचों पर लड़ी जाती है। और उन्हीं में से एक है समुंदर के नीचे बिछा हुआ इंटरनेट का निज़ाम (Internet Infrastructure – डिजिटल ढांचा)। अक्सर लोग यह समझते हैं कि इंटरनेट सैटेलाइट (Satellite) के जरिए चलता है, लेकिन हक़ीक़त इससे बिल्कुल मुख्तलिफ़ (Different) है। दुनिया का तकरीबन 95% से ज़्यादा डेटाबैंकिंग ट्रांजैक्शन (Bank Transactions), क्लाउड सर्विस (Cloud Services), ईमेल (Email) सब कुछ समुंदर के नीचे बिछी फाइबर ऑप्टिक केबल्स (Fiber Optic Cables – इंटरनेट के तार) के जरिए गुजरता है। यही वह बुनियादी ढांचा (Backbone) है, जिस पर पूरी डिजिटल दुनिया खड़ी है। हालिया दावों में यह कहा जा रहा है कि Iran इन केबल्स को निशाना बना सकता है। लेकिन यहाँ सबसे अहम बात यह है अब तक ऐसी किसी सीधी, आधिकारिक धमकी या कार्रवाई की पुष्टि नहीं हुई है। यह सच है कि पर्शियन गल्फ (Persian Gulf – खाड़ी इलाक़ा) एक बेहद अहम डेटा रूट (Data Route) है, जहाँ स...

ईरान के लिए आर्थिक इआनत की खबर: हक़, इंसाफ़ और आलमी यकजहती के नजरिये से एक गहरा तजज़िया।

आज के इस अशोबज़दा (Turbulent – अशांत) दौर में, जब आलमी सियासत (Global Politics) हर रोज़ एक नया मोड़ ले रही है, एक खबर ने कई ज़ेहनों (Minds) में हलचल पैदा कर दी क्या वाक़ई Embassy of Iran, New Delhi ने एक क्यूआर कोड (QR Code – डिजिटल भुगतान माध्यम) जारी किया है ताकि ईरान की अवाम (Public) की मआशी (Economic) इआनत (Help) की जा सके? सबसे पहले ज़रूरी है कि इस तरह की खबरों को तस्दीक़ (Verification – पुष्टि) के तराज़ू (Scale) पर तौला जाए। किसी भी मुल्क का सफ़ारतख़ाना (Embassy) आम तौर पर सीधे अवाम से फंड (Funds) इकट्ठा करने के लिए खुले तौर पर क्यूआर कोड जारी नहीं करता खासकर ऐसे नाज़ुक दौर में। अगर ऐसा कोई क़दम उठाया जाता, तो वह बड़े पैमाने पर आधिकारिक एलान (Official Announcement) और भरोसेमंद ज़राए (Sources) के ज़रिये सामने आता। ईरान, जिसे Iran के नाम से जाना जाता है, कुदरती वसाइल (Natural Resources) से मालामाल है नफ़्त (Oil – तेल), गैस (Gas) और दूसरी दौलतें (Resources) उसकी मआशियात (Economy) की बुनियाद हैं। लेकिन जंग (War) और पाबंदियों (Sanctions) के दौर में, कोई भी मुल्क अस्थायी दबाव (Temporar...

सिनो हक़ीक़त बनाम हिंदुस्तानी तखय्युल: तामीर (Development) की दौड़ में हम कहाँ खड़े हैं?

चाइना हमसे कितना आगे है, 50 साल, सौ साल या 500 सौ साल? जो लोग टीवी को ज्ञान और खबरों का श्रोत मान लिए वे न सिर्फ अपना बल्कि अनजाने में इस देश और आने वाली पीढ़ी का भविष्य खराब कर रहे हैं। सच तो यह है कि हमारी सरकार कुछ कर ही नहीं रही है सिवाय टीवी शोज और प्रोपेगंडा के। इस टीवी शो और प्रोपेगंडा के सबसे बड़े ग्राहक अंधभक्त है, ऐसे अंधभक जो आज भी इस भ्रम में जी रहे हैं कि केवल टीवी पर बकलोली करने से, नारा गढ़ने, प्रोपेगंडा और नैरेटिव बनाने से देश आगे बढ़ सकता है। लेकिन सच्चाई यह है कि आज के समय में वही देश आगे बढ़ रहा है, जो धर्म जाती और नफरत की राजनीति से बाहर निकल कर, अंधविश्वास और पाखंड से बाहर निकल कर विज्ञान, टेक्नोलॉजी, रिसोर्स डेवलपमेंट, स्किल्ड डेवलपमेंट, वर्कफोर्स और मजबूत शिक्षा व्यवस्था पर काम कर रहा है। चीन इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। आज अगर आप बाजार में जाएं, किसी भी इलेक्ट्रॉनिक सामान चाहे वह मोबाइल हो, कंप्यूटर हो या उनके चिप हो, उसको देखें, तो उसमें ज्यादा से ज्यादा चीन के सामान मिलेंगे। चीन ने क्या कुछ नहीं किया है, इंसान की जरूरतों के लिए हर एक सामान का एडवांस लेवल पर रिसर्...

An Official Record of My Ghazals & Poetic Ownership

📜 Copyright Declaration I, Mohd Tariq Azim (official), in the poetic world known as Tariq Azeem Tanha, hereby declare that all the ghazals and verses presented below are my original creations. I had shared these works with a senior singer/Qawwal (Rizwan Ji) from my village (whom I respectfully address as “Chacha”) solely for singing and recitation purposes on 22 March 2026. This publication is made only to establish and affirm my intellectual ownership (copyright) over these works. Any use, reproduction, publication, or presentation of these verses without my explicit permission shall be considered unethical and unlawful. 📜 इज़्हार-ए-हक़ (कॉपीराइट बयान) मैं, मोहम्मद तारिक़ अज़ीम (ऑफिशियल), शायरी की दुनिया में “तारिक़ अज़ीम तनहा”, ब-इज़्हार अर्ज़ करता हूँ कि यहाँ दर्ज तमाम ग़ज़लियात व अशआर मेरी ज़ाती तख़्लीक़ हैं। इन्हें मैंने अपने गाँव के एक बुज़ुर्ग गायक/क़व्वाल (रिज़वान जी), जिन्हें मैं अदब से “चाचा” कहता हूँ, के पास महज़ तरन्नुम (गायन) व पेशकश के लिए दिनांक 22 मार्च 2026 को साझा क...