दुनिया की नज़रें इस वक़्त सिर्फ़ मिसाइलों और हमलों की सुर्ख़ियों पर टिकी हैं, मगर समंदर के सीने में एक और कहानी पल रही है ख़ामोश, मगर कहीं ज़्यादा ख़तरनाक। मामला शुरू होता है हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य (Hormuz Strait) से वो अहम गुज़रगाह (Sea Route) जिससे दुनिया का बड़ा हिस्सा तेल और तिजारत (Trade) हासिल करता है। जब यह रास्ता महदूद (Restricted) हुआ, तो जहाज़ों की रफ़्तार थम गई। पहले कुछ, फिर दर्जनों, और अब सैकड़ों जहाज़ खाड़ी में ठहर गए। यह ठहराव सिर्फ़ माल का नहीं था यह इंसानी ज़िंदगियों का ठहराव भी बन गया। इन जहाज़ों के अंदर मौजूद क्रू (Crew – जहाज़ी अमला) अब राशन बाँटकर खा रहा है। पानी महदूद है, ईंधन (Fuel) कम होता जा रहा है, और 45 डिग्री की शदीद गर्मी में ये जहाज़ समंदर में जैसे कैद हो गए हैं। मगर असली ख़तरा यहीं खत्म नहीं होता। हालिया दिनों में कई जहाज़ों पर हमले हुए हैं। कहीं आग लगी, कहीं तेल का रिसाव (Oil Spill) हुआ, और कहीं जहाज़ सीधे निशाना बने। यह कोई स्थिर सूरत-ए-हाल (Stable Situation) नहीं—यह एक वक़्ती बम (Ticking Time Bomb) है जो किसी भी लम्हे फट सकता है। अब तस्वीर का ...
इलाहाबाद HC की लखनऊ बेंच के सामने मंडरा रहा है एक ऐसा फैसला जो राहुल गांधी के लिए या तो “कानून की गरिमा” बहाल करेगा, या फिर उनकी पूरी राजनीतिक वैधता को ही झकझोर देगा – फॉर्म‑एरर, ब्रिटिश रिकॉर्ड्स और MHA की फाइलों के बीच खेला जा रहा है ये जंग‑खेल, जहाँ हर शब्द नागरिकता या नेतृत्व दोनों पर सवाल खड़ा कर सकता है। राहुल गांधी की “ब्रिटिश नागरिकता” वाली कहानी आज भारतीय राजनीति की सबसे ड्रामेटिक और विवादास्पद लीगल‑पोलिटिकल वार‑गेम्स में से एक बन चुकी है। ये वो केस नहीं है जो अचानक खुला है, ये लगभग 20 सालों का जमा‑पूँजी बनकर आज एक विस्फोटक तबके में घुस चुका है। मजे की बात ये है कि इस पूरे शो की रूट बेड 2003 की एक छोटी‑सी ब्रिटिश कंपनी “Backops Limited” पर टिकी है। राहुल गांधी ने तब एक इंजीनियरिंग‑डिजाइन आउटसोर्सिंग कंपनी बनाई, जिसमें वे डायरेक्टर और सेक्रेटरी थे। UK Companies House के रिकॉर्ड्स में कुछ फॉर्म्स पर उनकी राष्ट्रीयता “British” दर्ज थी, कुछ में “Indian”, और कुछ पर खुद हाथ से “British” काटकर “Indian” लिखा गया है। बस इसी एक फॉर्म‑फिलिंग डिफरेंस पर 2015 स...