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ईरान के लिए आर्थिक इआनत की खबर: हक़, इंसाफ़ और आलमी यकजहती के नजरिये से एक गहरा तजज़िया।

आज के इस अशोबज़दा (Turbulent – अशांत) दौर में, जब आलमी सियासत (Global Politics) हर रोज़ एक नया मोड़ ले रही है, एक खबर ने कई ज़ेहनों (Minds) में हलचल पैदा कर दी क्या वाक़ई Embassy of Iran, New Delhi ने एक क्यूआर कोड (QR Code – डिजिटल भुगतान माध्यम) जारी किया है ताकि ईरान की अवाम (Public) की मआशी (Economic) इआनत (Help) की जा सके? सबसे पहले ज़रूरी है कि इस तरह की खबरों को तस्दीक़ (Verification – पुष्टि) के तराज़ू (Scale) पर तौला जाए। किसी भी मुल्क का सफ़ारतख़ाना (Embassy) आम तौर पर सीधे अवाम से फंड (Funds) इकट्ठा करने के लिए खुले तौर पर क्यूआर कोड जारी नहीं करता खासकर ऐसे नाज़ुक दौर में। अगर ऐसा कोई क़दम उठाया जाता, तो वह बड़े पैमाने पर आधिकारिक एलान (Official Announcement) और भरोसेमंद ज़राए (Sources) के ज़रिये सामने आता। ईरान, जिसे Iran के नाम से जाना जाता है, कुदरती वसाइल (Natural Resources) से मालामाल है नफ़्त (Oil – तेल), गैस (Gas) और दूसरी दौलतें (Resources) उसकी मआशियात (Economy) की बुनियाद हैं। लेकिन जंग (War) और पाबंदियों (Sanctions) के दौर में, कोई भी मुल्क अस्थायी दबाव (Temporar...

हक़ीक़त बनाम हेडलाइन: क्या वाक़ई ईरान हिल गया या सिर्फ़ एक सियासी बयानिया?

सुबह की पहली रोशनी के साथ जब आँख खुली तो फ़िज़ा में वही शोर गूंज रहा था—हमले, कमांडरों की मौत, और यह दावा कि ईरान की कमर टूट गई। एक लम्हे के लिए लगा कि जैसे पूरी कहानी यहीं खत्म हो गई हो, लेकिन जब ज़रा तअम्मुल (गौर) से देखा, तो एहसास हुआ कि यह हक़ीक़त से ज़्यादा एक बयानिया (narrative) है, जो हेडलाइनों की गर्मी में ढल रहा है। बेशक हमला हुआ, और ऐसा हुआ जो अपनी बारीकी (precision) और असरअंदाज़ी में कम नहीं था। बड़े ओहदेदार मारे गए, और किसी भी निज़ाम के लिए यह एक सदमा होता है कि उसके अहम चेहरे अचानक गायब हो जाएँ। लेकिन सवाल यह है कि क्या चेहरों के चले जाने से पूरा जिस्म भी गिर जाता है? क्या एक सर के कटने से बदन सांस लेना छोड़ देता है? हक़ीक़त यह है कि हर मजबूत निज़ाम अपने आपको सिर्फ अफ़राद (individuals) पर नहीं, बल्कि एक मुकम्मल ढांचे (structure) पर खड़ा करता है। इसी लिए Islamic Revolutionary Guard Corps जैसा इदारा अपनी तश्कील में इस कदर मुस्तहकम है कि अगर एक कड़ी टूटे, तो दूसरी फौरन उसकी जगह ले लेती है। यहाँ फैसले सिर्फ शख्सियतों से नहीं, बल्कि पहले से तयशुदा उसूलों, ज़ंजीर-ए-क...

मशरिक़-ए-वुसता की सुलगती जंग: ताक़त, सियासत और इंसानियत का इम्तिहान

इज़राइल ने जंग में हुए नुक़सान की मीडिया कवरेज पर सख़्त पाबंदी आइद कर दी है। कहा जा रहा है कि तेल अवीव, यरूशलेम और पूरे इज़राइल में ईरानी मिसाइलों से होने वाली तबाही की वीडियोग्राफ़ी और तस्वीरें लेने पर सख़्त रोक लगा दी गई है। यहाँ तक कि इन वीडियोज़ और तस्वीरों को इज़राइल से बाहर भेजने पर भी सख़्त क़िस्म की मनाही कर दी गई है। हुकूमत का कहना है कि इससे मुल्क की सिक्योरिटी और फ़ौजी मुक़ामात से जुड़ी मालूमात दुश्मनों तक पहुँच सकती है, इसलिए ऐसी रिपोर्टिंग पर पाबंदी ज़रूरी समझी गई। दूसरी तरफ़ अमरीका और इज़राइल लगातार यह दावा कर रहे हैं कि उनके हमलों से ईरान को बहुत बड़ा नुक़सान पहुँचा है। मगर अगर वाक़ई ईरान इतनी बुरी तरह तबाह हो चुका है तो फिर वह हथियार क्यों नहीं डाल रहा? जो अमरीका जंग के आग़ाज़ में यह कह रहा था कि सिर्फ़ 48 घंटों में ईरान में हुकूमत तब्दील हो सकती है, अब उस जंग को बारह दिन से ज़्यादा गुज़र चुके हैं और हालात अब भी नाज़ुक बने हुए हैं। ईरानी क़ियादत किसी क़िस्म के मुआहिदे या समझौते के लिए तैयार नज़र नहीं आती। कई तजज़ियाकार यह सवाल भी उठा रहे हैं कि कहीं इज़राइल के साथ खड़...

जंग, जमीर और विजयी भाव का वहम

क्या जंग सिर्फ मैदान मे दुश्मन को हराकर जीती जाती है.. अगर जंग जीतने का यही पैमाना है तो फिर इस दुनिया मे कमज़ोर को ज़िंदा रहने का कोई हक नहीं। मुझे याद है कि सिक्सथ की उर्दू की किताब मे एक सबक "अब्बू ख़ां की बकरी" के उन्वान से था जिसमे अब्बू ख़ां की तमाम बकरियां रेवड़ के उसूलों को फ़ालो करती थीं सिवाये चांदनी के, और कभी पहाड़ी के उस तरफ़ नहीं जाती थीं जिधर एक भेड़िया रहता था मगर चांदनी एक रात रेवड़ से अलग होकर पहाड़ी के उस तरफ़ गयी और सारी रात उस भेड़िये से लड़कर सुब्ह को हलाक हो गयी। भेड़िये के दांत और पंजे चांदनी से ज़्यादा मज़बूत थे तो आख़िर में चांदनी को मारा जाना था लेकिन क्या चांदनी सिर्फ यूंही मारी गयी कि उसके पास नुकीले दांत और पंजे ना होकर सिर्फ दो सींग थे। नहीं वह इसीलिए मारी गयी क्योकि बकरियो के उस रेवड़ मे उसके अलावा किसी मे भेड़िये से लड़ने का हौसला नहीं था। इस कहानी को सुनिये और एक अपना साइक्लोजिकल टैस्ट कीजिये। अगर आप इस कहानी को पढते हुये भेड़िये के तरफदार हैं तो आप इतने बुज़दिल हैं कि हर हाल मे जीतने वाले की तरफ़ होकर एक जीती हुयी साइड मे होने का साइक्लोजिकल...