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ईरान के लिए आर्थिक इआनत की खबर: हक़, इंसाफ़ और आलमी यकजहती के नजरिये से एक गहरा तजज़िया।

आज के इस अशोबज़दा (Turbulent – अशांत) दौर में, जब आलमी सियासत (Global Politics) हर रोज़ एक नया मोड़ ले रही है, एक खबर ने कई ज़ेहनों (Minds) में हलचल पैदा कर दी क्या वाक़ई Embassy of Iran, New Delhi ने एक क्यूआर कोड (QR Code – डिजिटल भुगतान माध्यम) जारी किया है ताकि ईरान की अवाम (Public) की मआशी (Economic) इआनत (Help) की जा सके? सबसे पहले ज़रूरी है कि इस तरह की खबरों को तस्दीक़ (Verification – पुष्टि) के तराज़ू (Scale) पर तौला जाए। किसी भी मुल्क का सफ़ारतख़ाना (Embassy) आम तौर पर सीधे अवाम से फंड (Funds) इकट्ठा करने के लिए खुले तौर पर क्यूआर कोड जारी नहीं करता खासकर ऐसे नाज़ुक दौर में। अगर ऐसा कोई क़दम उठाया जाता, तो वह बड़े पैमाने पर आधिकारिक एलान (Official Announcement) और भरोसेमंद ज़राए (Sources) के ज़रिये सामने आता। ईरान, जिसे Iran के नाम से जाना जाता है, कुदरती वसाइल (Natural Resources) से मालामाल है नफ़्त (Oil – तेल), गैस (Gas) और दूसरी दौलतें (Resources) उसकी मआशियात (Economy) की बुनियाद हैं। लेकिन जंग (War) और पाबंदियों (Sanctions) के दौर में, कोई भी मुल्क अस्थायी दबाव (Temporar...

ईरान: सिर्फ़ एक मुल्क नहीं, बल्कि ‘आज़्म-ओ-इरादा’ की दास्तान — पाबंदियों, जंग और सियासत के दरमियान एक क़ौम का सब्र

इज़राइल ने जंग में हुए नुक़सान की मीडिया कवरेज पर सख़्त पाबंदी आइद कर दी है। कहा जा रहा है कि तेल अवीव, यरूशलेम और पूरे इज़राइल में ईरानी मिसाइलों से होने वाली तबाही की वीडियोग्राफ़ी और तस्वीरें लेने पर सख़्त रोक लगा दी गई है। यहाँ तक कि इन वीडियोज़ और तस्वीरों को इज़राइल से बाहर भेजने पर भी सख़्त क़िस्म की मनाही कर दी गई है। हुकूमत का कहना है कि इससे मुल्क की सिक्योरिटी और फ़ौजी मुक़ामात से जुड़ी मालूमात दुश्मनों तक पहुँच सकती है, इसलिए ऐसी रिपोर्टिंग पर पाबंदी ज़रूरी समझी गई। दूसरी तरफ़ अमरीका और इज़राइल लगातार यह दावा कर रहे हैं कि उनके हमलों से ईरान को बहुत बड़ा नुक़सान पहुँचा है। मगर अगर वाक़ई ईरान इतनी बुरी तरह तबाह हो चुका है तो फिर वह हथियार क्यों नहीं डाल रहा? जो अमरीका जंग के आग़ाज़ में यह कह रहा था कि सिर्फ़ 48 घंटों में ईरान में हुकूमत तब्दील हो सकती है, अब उस जंग को बारह दिन से ज़्यादा गुज़र चुके हैं और हालात अब भी नाज़ुक बने हुए हैं। ईरानी क़ियादत किसी क़िस्म के मुआहिदे या समझौते के लिए तैयार नज़र नहीं आती। कई तजज़ियाकार यह सवाल भी उठा रहे हैं कि कहीं इज़राइ...

मशरिक़-ए-वुसता की सुलगती जंग: ताक़त, सियासत और इंसानियत का इम्तिहान

इज़राइल ने जंग में हुए नुक़सान की मीडिया कवरेज पर सख़्त पाबंदी आइद कर दी है। कहा जा रहा है कि तेल अवीव, यरूशलेम और पूरे इज़राइल में ईरानी मिसाइलों से होने वाली तबाही की वीडियोग्राफ़ी और तस्वीरें लेने पर सख़्त रोक लगा दी गई है। यहाँ तक कि इन वीडियोज़ और तस्वीरों को इज़राइल से बाहर भेजने पर भी सख़्त क़िस्म की मनाही कर दी गई है। हुकूमत का कहना है कि इससे मुल्क की सिक्योरिटी और फ़ौजी मुक़ामात से जुड़ी मालूमात दुश्मनों तक पहुँच सकती है, इसलिए ऐसी रिपोर्टिंग पर पाबंदी ज़रूरी समझी गई। दूसरी तरफ़ अमरीका और इज़राइल लगातार यह दावा कर रहे हैं कि उनके हमलों से ईरान को बहुत बड़ा नुक़सान पहुँचा है। मगर अगर वाक़ई ईरान इतनी बुरी तरह तबाह हो चुका है तो फिर वह हथियार क्यों नहीं डाल रहा? जो अमरीका जंग के आग़ाज़ में यह कह रहा था कि सिर्फ़ 48 घंटों में ईरान में हुकूमत तब्दील हो सकती है, अब उस जंग को बारह दिन से ज़्यादा गुज़र चुके हैं और हालात अब भी नाज़ुक बने हुए हैं। ईरानी क़ियादत किसी क़िस्म के मुआहिदे या समझौते के लिए तैयार नज़र नहीं आती। कई तजज़ियाकार यह सवाल भी उठा रहे हैं कि कहीं इज़राइल के साथ खड़...

क्या पश्चिमी एशिया में अमरीकी असर का दौर ख़त्म हो रहा है?

▪️इस्राइली सहाफ़ी अलोन मिज़राही ने अपने एक तजज़िये में लिखा है: “हम तारीख़ को अपनी आँखों के सामने वक़ूअ पज़ीर होते देख रहे हैं। तमाम तवक़्क़ोआत के बरअक्स, ईरान इस वक़्त अमरीकी फ़ौजी अड्डों को इस क़दर गहराई और इस क़दर फ़ैसला-कुन अंदाज़ में निशाना बना रहा है कि दुनिया अभी तक इस मंजर को समझने के लिए तैयार ही नहीं। सिर्फ़ चार रोज़ के अंदर ईरान ने पूरे इलाक़े में अपने फ़ौजी असर-ओ-रसूख़ का दायरा काफ़ी वसीअ कर लिया है। ईरान ने दुनिया के सबसे क़ीमती और महंगे फ़ौजी अड्डों, अस्लाहे और निज़ामात को अपना निशाना बनाया है। बहरीन, कुवैत, क़तर और सऊदी अरब में मौजूद अमरीकी अड्डे दुनिया के सबसे बड़े और अहम अस्करी ठिकानों में शुमार किए जाते हैं। इन्हें तामीर करने में कई दशकों की मेहनत और खरबों डॉलर की सरमायाकारी शामिल रही है। यूँ समझिए कि तीस बरस से ज़्यादा के अस्करी इख़राज़ात का बड़ा हिस्सा अब धुएँ में तब्दील होता नज़र आ रहा है। हम देख रहे हैं कि करोड़ों डॉलर क़ीमत के रडार चंद लम्हों में नेस्त-ओ-नाबूद हो रहे हैं। मुकम्मल फ़ौजी छावनियाँ ख़ाली कर दी गयी हैं, कुछ को आग के हवाले कर दिया गया है और ...

रहबर-ए-मोअज़्ज़म: हिम्मत, सियासत और वफ़ादारी की मिसाल

रहबर ए मोज़्ज़म,खामेनई साहब आपकी बहादुरों वाली ज़िंदगी को भी सलाम और आपकी फ़ख्र वाली शहादत को भी सलाम। हमें फ़ख्र है आप “Nation Of Father” से डरे नहीं,आप Nation Of Father के Father के आगे भी झुके नहीं, हमे फ़ख्र है आपने Nation Of Father के लिये लौंडा नाच नहीं किया,हमें फ़ख्र है आप एक ट्वीट तो छोड़िये बल्कि उसकी खुली धमकी और ऑफर पर भी “सरेंडर” नहीं किये ,हमें फ़ख्र है आपने किसी विष गुरु की तरह नाटक और ड्रामा नहीं किया,हमें फ़ख्र है आपने अपने मुल्क को Nation Of Father के Father के कदमों मे गिरवी नहीं रखा, हमें फ़ख्र है आपने हमारे गुरुर का सौदा नहीं किया,हमें फ़ख्र है आप बंकरों मे छुपे नहीं,हमें फ़ख्र है आप भागे नहीं, हमें आपकी ज़िंदगी पर फ़ख्र है हमें आपकी शहादत पर फ़ख्र है। बतौर हिंदुस्तानी हम हमेशा शुक्रगुज़ार रहेंगे आपके, कश्मीर जैसे मामले पर आपने संयुक्त राष्ट्र मे भारत का खुला समर्थन किया, अमेरिका के तमाम दबाव के बाद भी आपने एक नहीं बल्कि कई बार भारत को अपना समर्थन दिया।आपने पाकिस्तान के खिलाफ़ हमेशा हमारा साथ दिया,ऊर्जा के क्षेत्र में आपने भारत को सुरक्षा मुहैया करवाई,आपने भारत को सस्ता ...

क्या भारत को जंग में घसीटा जा रहा है? हिन्द महासागर की बड़ी घटना

सदियों में जो ना हुआ वो हो गया ,  कल अमेरिका ने ईरान के युद्धपोत IRIS DENA को श्रीलंका के पास   डुबो दिया , जिसमें 100-150 ईरान के सैनिक मारे गए ,  वहीं भारत में बहस छिड़ गई कि ये ईरान का युद्धपोत भारत द्वारा आयोजित इंटरनेशनल फ़्लीट रिव्यू और  MILAN -2026 के नौसैना अभ्यास के लिए आया था और विशाखापट्टनम से निकलने के बाद श्रीलंका के पास अमेरिका ने पनडुब्बी से उड़ा दिया जो कि भारत का मेहमान था , भारत की जिम्मेदारी बनती है ,  शायद ये बहस भारत की नैतिक जिम्मेदारी की हो रही है वहीं लोग कह रहे हैं भारत की जल सीमा 12 NM पर खत्म हो जाती है क्योंकि 12 NM से आगे अंतराष्ट्रीय जल सीमा चालू हो जाती है ,  अब मुद्दे पर आते हैं , क्या भारत की जल सीमा 12 नॉटिकल मील है ??  क्या भारत की जिम्मेदारी 12 नॉटिकल मील दूर खत्म हो जाती है ??  आपको जानकारी दुरुस्त करना चाहता हूँ किसी देश की जमीन से 12 समुद्री मील की दूरी तक उसका टेरिटोरियल क्षेत्र होता है जो कि सही है ,  अब बात जिम्मेदारी की आती है तो भारत हिन्द महासागर में 12 समुद्री मील तक सीमित नहीं है ,  भार...

From Superpowers to Surrender: The Harsh Reality of Modern Warfare

पूर्व सोवियत संघ ने अफगानिस्तान पर 20 लाख बम गिराए, लेकिन जंग हार गया।  अमेरिका ने वियतनाम पर 75 लाख बम गिराए, पर हारकर भागना पड़ा।  फिर अमेरिका ने अफगानिस्तान पर 2 लाख बम गिराए, तब भी तालिबान डटा रहा।  सिर्फ़ बम गिराने से अगर जंग जीता गया होता तो आज ईरान समझौते की टेबल पर होता।  लेकिन, कल अमेरिका ने तकरीबन पूरे मिडिल ईस्ट से भागना ठीक समझा।  सारे दूतावास बंद। सैनिक होटलों में और अमेरिकी मदद बंद। यही ईरान का वॉर मॉडल है, जिसकी ताकत भारत में नहीं है।  भारत अब सुविधाभोगी है। वह उस 60–70 के दशक में नहीं लौटना चाहता, जब हमने लड़ाइयां जीती थी।  हमें खाने को चाइनीज चाहिए, पिज्जा चाहिए, पीने को कोक। शॉपिंग को आलीशान मॉल, चलने को चमचमाती सड़कें और दौड़ने को कार।  हमारी इकॉनमी बेबस है और इस विकास को कायम रखने की कोई भी कीमत चुकाकर हम कॉम्प्रोमाइज्ड होने के लिए तैयार हैं।  नतीज़ा–सामने एक सरेंडर का चेहरा है। एक भ्रष्ट, आतंकी सत्ता।  कानून–व्यवस्था को एक तरफ रख भी दें तो इस विकास की हम क्या कीमत चुका रहे हैं? अपनी आत्मनिर्भरता और सार्वभौमिकता को गि...