रहबर ए मोज़्ज़म,खामेनई साहब आपकी बहादुरों वाली ज़िंदगी को भी सलाम और आपकी फ़ख्र वाली शहादत को भी सलाम।
हमें फ़ख्र है आप “Nation Of Father” से डरे नहीं,आप Nation Of Father के Father के आगे भी झुके नहीं, हमे फ़ख्र है आपने Nation Of Father के लिये लौंडा नाच नहीं किया,हमें फ़ख्र है आप एक ट्वीट तो छोड़िये बल्कि उसकी खुली धमकी और ऑफर पर भी “सरेंडर” नहीं किये ,हमें फ़ख्र है आपने किसी विष गुरु की तरह नाटक और ड्रामा नहीं किया,हमें फ़ख्र है आपने अपने मुल्क को Nation Of Father के Father के कदमों मे गिरवी नहीं रखा, हमें फ़ख्र है आपने हमारे गुरुर का सौदा नहीं किया,हमें फ़ख्र है आप बंकरों मे छुपे नहीं,हमें फ़ख्र है आप भागे नहीं, हमें आपकी ज़िंदगी पर फ़ख्र है हमें आपकी शहादत पर फ़ख्र है।
बतौर हिंदुस्तानी हम हमेशा शुक्रगुज़ार रहेंगे आपके, कश्मीर जैसे मामले पर आपने संयुक्त राष्ट्र मे भारत का खुला समर्थन किया, अमेरिका के तमाम दबाव के बाद भी आपने एक नहीं बल्कि कई बार भारत को अपना समर्थन दिया।आपने पाकिस्तान के खिलाफ़ हमेशा हमारा साथ दिया,ऊर्जा के क्षेत्र में आपने भारत को सुरक्षा मुहैया करवाई,आपने भारत को सस्ता तेल मुहैया कराया और ऐसे अनगिनत अहसान आपके हमारे मुल्क भारत पर हैं।
हमारे मुल्क भारत के लिये आपके ख़ूलूस,आपकी दोस्ती,आपके अहसान इतिहास मे दर्ज हैं जिसे कोई भी Nation Of Father और उसका Father भी नहीं मिटा सकता, ना झुठला सकता है।
हमारी साँसें अल्लाह की है और अल्लाह ने अपनी मसलहत के मुताबिक तय वक़्त पर आपको दुनिया ए फ़ानी से बा इज़्ज़त अपने पास बुला लिया।
आप कहते थे आपकी ज़िंदगी अल्लाह की अमानत है अल्लाह जब चाहेगा अपनी अमानत ले लेगा,अल्लाह आपकी शहादत को क़ुबूल करे रहबर ए मोज़्ज़म,अल्लाह ने जिस तरह दुनिया मे आपके दर्जात बुलंद रखा उसी तरह अल्लाह आपको कभी ना ख़त्म वाली उस असली ज़िंदगी मे भी आपके दर्जात बुलंद रखे।
मुनाफिक़ मरेंगे बिस्तरों मे,
हम तो मैदानों मे मारे जायेंगे.
आपने किसी विष गुरु नामक ग़ुलाम की तरह ज़िल्ल्त की ज़िंदगी को दुत्कार कर अपने देश,अपनी क़ौम के सर बुलंद करने की जद्दोजहद मे आखिरी वक़्त तक मैदान मे लड़ते रहे, हमें फ़ख्र है आप पर।
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