“समुंद्री केबल्स का ख़तरा: क्या ईरान आलमी इंटरनेट निज़ाम (Global Internet System) को मुअत्तल (Disrupt) कर सकता है?”
आज की दुनिया में जंग (War) सिर्फ़ मिसाइल (Missiles) और टैंक (Tanks) तक महदूद नहीं रही, बल्कि यह एक ऐसे मुकाम (Stage) पर पहुँच चुकी है जहाँ असल जंग नजरों से ओझल (Invisible) ढांचों पर लड़ी जाती है। और उन्हीं में से एक है समुंदर के नीचे बिछा हुआ इंटरनेट का निज़ाम (Internet Infrastructure – डिजिटल ढांचा)।
अक्सर लोग यह समझते हैं कि इंटरनेट सैटेलाइट (Satellite) के जरिए चलता है, लेकिन हक़ीक़त इससे बिल्कुल मुख्तलिफ़ (Different) है। दुनिया का तकरीबन 95% से ज़्यादा डेटाबैंकिंग ट्रांजैक्शन (Bank Transactions), क्लाउड सर्विस (Cloud Services), ईमेल (Email) सब कुछ समुंदर के नीचे बिछी फाइबर ऑप्टिक केबल्स (Fiber Optic Cables – इंटरनेट के तार) के जरिए गुजरता है।
यही वह बुनियादी ढांचा (Backbone) है, जिस पर पूरी डिजिटल दुनिया खड़ी है।
हालिया दावों में यह कहा जा रहा है कि Iran इन केबल्स को निशाना बना सकता है। लेकिन यहाँ सबसे अहम बात यह है
अब तक ऐसी किसी सीधी, आधिकारिक धमकी या कार्रवाई की पुष्टि नहीं हुई है।
यह सच है कि पर्शियन गल्फ (Persian Gulf – खाड़ी इलाक़ा) एक बेहद अहम डेटा रूट (Data Route) है, जहाँ से एशिया और यूरोप के बीच बड़ी मात्रा में इंटरनेट ट्रैफिक गुजरता है। लेकिन यह भी उतना ही सच है कि दुनिया का इंटरनेट सिर्फ़ एक रास्ते पर मुनहसिर (Dependent) नहीं है।
कई मुतबादिल (Alternative) रास्ते मौजूद हैं अलग-अलग समुंद्री केबल नेटवर्क ज़मीनी (Terrestrial) फाइबर रूट
सैटेलाइट बैकअप (Satellite Backup) हाँ, अगर किसी एक अहम केबल में खराबी आती है, तो इंटरनेट की स्पीड (Speed) और लेटेंसी (Latency – देरी) पर असर पड़ सकता है। इसका एक मिसाल 2008 में देखा गया था, जब एक केबल खराब होने से कई मुल्कों में इंटरनेट की रफ्तार कम हो गई थी। मगर पूरा इंटरनेट बंद नहीं हुआ था।
यह कहना कि “पूरी दुनिया का इंटरनेट तबाह हो जाएगा” एक बड़ा मुबालग़ा (Exaggeration) है। जहाँ तक क्लाउड प्लेटफॉर्म्स (Cloud Platforms) जैसे Amazon Web Services, Microsoft Azure और Google Cloud का ताल्लुक है, इनके पास मल्टी-रीजनल (Multi-Regional) और रेडंडेंट (Redundant – बैकअप) सिस्टम होते हैं, जो ऐसे हालात में भी सर्विस को पूरी तरह बंद नहीं होने देते।
असल खतरा क्या है?
इंटरनेट “गायब” नहीं होगा, लेकिन “धीमा, महँगा और अस्थिर” (Unstable) जरूर हो सकता है यानी असर होगा
फाइनेंशियल सिस्टम (Financial System) पर दबाव
स्टॉक मार्केट (Stock Market) में उतार-चढ़ाव
क्लाउड और डिजिटल सर्विसेज़ में रुकावट
मगर यह एक मुकम्मल तबाही (Total Collapse) नहीं होगी। हक़ीक़त यह है आज की जंग सिर्फ़ सरहदों (Borders) पर नहीं, बल्कि नेटवर्क्स (Networks) पर भी लड़ी जा रही है। जहाँ एक केबल, एक सर्वर, या एक सिस्टम पूरे आलमी निज़ाम को हिला सकता है… मगर गिरा नहीं सकता।
आख़िर में यही कहा जा सकता है डर की फज़ा (Fear Narrative) बनाना आसान है, मगर हक़ीक़त हमेशा उससे ज़्यादा पेचीदा (Complex) होती है। इसलिए हर बड़ी खबर को समझने से पहले तस्दीक़ (Verification) और तजज़िया (Analysis) ज़रूरी है… क्योंकि डिजिटल दुनिया में सच और ख़ौफ़ के दरमियान फ़ासला (Gap) बहुत कम होता है।
तारिक़ अज़ीम तनहा
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