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Showing posts with the label सियासत

जिंदगी को गर बसर......

जिंदगी को गर बसर करना हैं तो खुद पे इक नज़र करना हैं बदल दीजिए निज़ाम ए चमन गर पैदा कोई दीदावर करना है पहले जानने है शऊरे-शायरी फिर खुदको सुख़नवर करना हैं खुशबख्ती यूँ हैं आबाद ...

इन्साफ कब होगा।

बादशाह ओ औलिया को ढूंढता हूँ मैं, हकपरस्त ए हुक़ुमरां को ढूंढता हूँ  मैं! दयारे-नसीम-ऐ-कानून हर सू चले, ऐसी  ही चमन ए फ़िज़ा ढूंढता हूँ मैं! वकारे-सू-ए-दारे-अहले-सिपाही, औरंगज़ेब  अ...

हुक़ूमत तेरे पाँव में ज़ंज़ीर हम डाल कर के रहेंगे।

क़ुरआन, इस्लाम, हदीस तो आसमानी हैं, तिरी हुक़ूमत तो बस पांच दिन की कहानी हैं! मिटा भी सकते हैं तिरी हुक़ूमत को हम सब, अगर हम ये सोच ले की हुक़ूमत मिटानी हैं! फ़ाक़ा करके भी रहे हैं जिन्द...