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जंग की नई सूरत: लंबी जंग, सख़्त निज़ाम और बढ़ती आग का बयानिया

कुर्सी की पेटी बाँध लीजिए, क्योंकि जो मंजर अब उभर रहा है, वह किसी जल्द ख़त्म होने वाली जंग का नहीं, बल्कि एक तवील (Long) और पेचीदा मरहले (Phase) की इब्तिदा (Beginning) है। फ़िज़ा में जो तनाव है, वह ठहरने के बजाय हर गुज़रते लम्हे के साथ और शदीद होता जा रहा है, और हालात यह इशारा दे रहे हैं कि अब यह टकराव एक मुकम्मल जंग (Full-scale Conflict) की शक्ल इख़्तियार कर सकता है। ईरान ने अपने अम्नी निज़ाम (Security Structure) के अहम चेहरों की हलाकत (Elimination) को तस्लीम (Accept) कर लिया है, और इसके साथ ही यह पैग़ाम भी दे दिया है कि जवाब ज़रूर आएगा—और वह पहले से कहीं ज़्यादा सख़्त और असरअंदाज़ होगा। मगर इस पूरे वाक़िये का असल पहलू यह है कि इन नुक़्सानात (Losses) के बावजूद ईरान की फौजी मशीनरी (Military Machine) में कोई इन्किसार (Collapse) नज़र नहीं आता। इसकी वजह साफ़ है यह निज़ाम अफ़राद (Individuals) पर नहीं, बल्कि एक मुकम्मल ढांचे (System) पर क़ायम है, जिसकी मिसाल Islamic Revolutionary Guard Corps जैसे इदारों से मिलती है, जहाँ हर ओहदे के लिए मुनासिब जानशीन (Successor) पहले से तय होता है। यानी यहा...

एक जंग, सौ असरात: तेल, बाज़ार और सियासत का तूफ़ान

ईरान पर हमले के दस दिन बाद अब सूरत-ए-हाल ख़ौफ़नाक होती जा रही है। बाज़ार पर एक अजीब सा ख़ौफ़ तारी है। जिस सेन्सेक्स और निफ्टी को Donald Trump के टैरिफ़ भी डेढ़ साल में ज़्यादा हिला न सके, उसी बाज़ार को इस जंग ने सिर्फ़ एक हफ़्ते में हिला कर रख दिया। जंग से पहले अगर कोई कहता कि निफ्टी 24000 से नीचे जाएगा तो लोग उसे दीवाना समझते, मगर आज निफ्टी उस सतह से नीचे जा चुका है और किसी को हैरत भी नहीं हो रही। रिज़र्व बैंक रुपया सँभालने में मुश्किल महसूस कर रहा है और सुबह-सुबह ही रुपया अपनी नई पस्त-तरीन सतह पर पहुँच गया। कच्चा तेल (Crude Oil) जो कभी 100 डॉलर पर पहुँचने को कोह-ए-एवरेस्ट समझा जाता था, आज आराम से 120 डॉलर के क़रीब पहुँच चुका है। हिसाब कहता है कि अगर कच्चा तेल एक डॉलर भी महँगा हो जाए तो भारत के आयाती बिल में लगभग 16 हज़ार करोड़ रुपये का इज़ाफ़ा हो जाता है। सोचिए जब तेल 65–70 डॉलर से बढ़कर 120 डॉलर तक पहुँच गया है तो इसका असर कितना संगीन होगा। अगर ये जंग एक महीना और जारी रहती है, तो शदीद महँगाई और ज़रूरी अशिया की किल्लत से इंकार नहीं किया जा सकता। ईरान के रहबर-ए-आला Ali Kha...

आज की रात क्यों बताई जा रही है ‘कयामत की रात’?

अभी तक ईरान ने बहरीन,यूएई,जॉर्डन सहित तीन अमेरिकी बेस के वायुरक्षा प्रणाली अर्थात "Thad" उड़ा दिए जिसको स्थापित करने में 4 दशक व अरबों डॉलर लगे है। ईरान ने खाड़ी देशों में स्थित सैन्य ठिकानों को भारी नुकसान पहुंचाया है।ईरानी हमलों में इजरायल का तेल-अवीव शहर खंडहर में तब्दील हो चुका है। अब तक चले युद्ध मे अमेरिका व इजरायल को ईरान के मुकाबले भारी नुकसान हुआ है।अमेरिका व इजरायल ईरान में नागरिक ठिकानों पर नुकसान कर पा रहे है लेकिन ईरानी मिसाइल सिस्टम व ड्रोन स्टोरेज पर हमला नहीं कर पा रहे है। दरअसल ईरान को पता था कि अमेरिका-इजरायल हमला जरूर करेंगे इसलिए 3 दशक से उसी अनुरूप तैयारी कर रहा था।सारा मिसाइल सिस्टम अंडरग्राउंड, सारा ड्रोन सिस्टम अंडरग्राउंड बनाया हुआ है जिसकी जानकारी सिर्फ ईरान के सैन्य कमांडर्स को है। ईरान ने जमीन पर जगह-जगह 3D पेंटिंग द्वारा एयरक्राफ्ट स्टेशन, रनवे, युद्धक जहाज इस तरह बनाये है कि एकबारगी नजदीक से देखने पर वास्तविक लगते है।इस तरह की टैक्टिक सामने वाले का युद्धक साजो-सामान बर्बाद करने के लिए बनाए गए है। जगह-जगह बैलून टैंक, फाइटर जहाज, मिसाइल्स...