Skip to main content

Posts

Showing posts with the label #ghazalwriting

How to write a sher | Ghazal | Tariq Azeem Tanha

कुछ दिनों पहले मैंने एक-एक शे'र पर मश्क़ करने की, जुनूँ करने की बात लिखी थी। कुछ मैसेजेस आए कि और अच्छी तरह समझाइए। ठीक है कोशिश करता हूँ। जो उस्ताद हैं वह इससे आगे न पढ़ें 😀 पहली बात यह कि रदीफ़ और क़ाफ़िया के बारे में मत सोचिए। ख़याल सोचिए। एक उदाहरण के द्वारा समझते हैं। समझिए कुछ देर सोचने पर आपको यह ख़याल आता है  कि "तेरी तस्वीर इसलिए ख़ूबसूरत है क्यूँ कि वह मेरे दिल में रखी है"। ख़याल आपको अच्छा लगा। यह ख़याल छोटी बह्र में बेहतर बैठेगा। आपने सोचा इसे फ़ाइलातुन, मुफ़ाइलुन, फ़ेलुन में बिठाने की कोशिश करते हैं। जो लेखन के शुरुआती दौर में हैं वह शायद (अनुभव से कह रहा हूँ 😀)  ऐसा लिख दें... मैंने रक्खी हुई है दिल में सो, तेरी तस्वीर ख़ूबसूरत है। ख़ुश हो गये.... पोस्ट कर दिया....है ना? बस यही नहीं करना है। यहाँ से आगे इस पर सोचना शुरू करना है। रदीफ़ और क़ाफ़िया का बंधन तो है नहीं। खुले दिल से सोचिए कि इस शे'र को और बेहतर कैसे करें। और सोचेंगे तो दिमाग़ कहेगा, दिल में तस्वीर रखना मतलब किसी से प्यार होना। और प्यार होता है किया नहीं जाता। तो फिर तस्वीर ख़ुद रखने की बात ...