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Ghazal | Rules & Regulations | Young Poets

कुछ लोगों के ग़ज़ल सोचने का और लिखने का तरीक़ा धुन से जुडा होता है। मतलब कुछ ग़ज़लियात जो धुनों पर पर गाई जा चुकी हैं उन्हें गुनगुनाते हुए उसी लय पर और उसी बह्र में उनकी ग़ज़ल बन जाती है। यह तस्लीम-शुदा तरीक़ा है। इससे ग़ज़ल में रवानी भी आती है। इसमें एक ही छोटी सी दिक़्क़त यह होती है कि इनमें से बहुत से शोअरा उस बह्र में लिख नहीं पाते जिसे वह किसी धुन पर गुनगुना नहीं पाते। यह भी कोई इतना बड़ा मसअला नहीं है। ज़ियादातर शोअरा की ग़ज़लियात कुछ गिनी-चुनी बहूर में ही होती हैं, ऐसी बहूर जिनकी लय उनकी रूह में बस जाती है। मगर इन शोअरा में कुछ ऐसे हैं जो धुन पर लिखने के बा'द फिर वह ग़ज़ल बह्र में है या नहीं यह देखने की भी सलाहियत नहीं रखते, और अना इतनी है कि कोई बता दे कि भाई बह्र की ग़लती हुई है तब भी क़ुबूल नहीं करेंगे, कहेंगे "बकवास... पढ़ते वक़्त बिल्कुल कोई भी सकता नहीं लगा तो बे-बह्र कैसे हो गयी?" भई ख़ुश रहें, जैसा भी चाहे लिखें। कोई मसअला नहीं। अब आप पूछेंगे कि फिर मसअला क्या है? मसअला है वह शोअरा जो समझते हैं कि जिस ग़ज़ल को वह ख़ुद किसी धुन में बिठा नहीं सकते वह ग़ज़ल दर...

सपनों की बाजारें, गुटबाजी और कविमंचों की दुकानदारी

कविलोक भी क्या अद्भुत है और क्या ही विशिष्ट एवं विरले व्यक्तित्व आप से दोचार होते हैं। आप कवि हैं, यानि आप सपने देखते ही होंगे बड़े बड़े मंचों से काव्यरस की फुहारें बरसाने के लिये। आपके अंदर का कवि अवश्य ही उमड़ पड़ता होगा लोगों की तालियों की गड़गड़ाहट के बीच खड़े होकर आभार प्रकट करने का। फूल माला, कैमरा, फैन फॉलोविंग और ऑटोग्राफ लेते हुए हुजूम के मध्य स्वयं के स्टारडम को महसूस करने उसे जीने और उसका आनंद उठाने का स्वप्न देखते ही होंगे। बड़ी बड़ी रकमों से भरे लिफाफे और उनके रास्ते आता वैभव और विलास भी आपके सपनों का हिस्सा अवश्य ही होगा। ऐसी आम धारणा तमाम मंचासीन वरिष्ठ सहज़ ही बना लेते हैं और इसके साथ आरम्भ होता है सपनों के बाजार सजाने का जहाँ आपके प्रातिभ, काव्य कौशल को एक बड़ा स्वप्निल मूल्य दिखाया जाता है जिसकी आमद भविष्य के गर्भ में होती है बस उसके लिये आपको झोंकना पड़ सकता है अपना सर्वश्व, जिसमें हो सकता है आपका स्वाभिमान, आपके सिद्धांत, आपकी मौलिकता और न मालूम क्या क्या? सपनों की बाजारें क्रय-विक्रय का मौखिक अनुबंध कर भविष्य के हाथ सौंप देते हैं लेन देन जो कालांतर में स्वप्न विक्रेता या क्रेत...