जावेद अख़्तर साहब के फैंस क्लब को जोर का झटका लगा है। इन्हें अपने मठाधीश की ऐसी दुर्गति की उम्मीद नहीं थी। मिथुन के फैंस मिथुन को पिटता हुआ नहीं देख सकते। जिस प्रकार जावेद साहब पूरी डिबेट में दाएं बाएं की बाते करते रहे वैसे ही ये लोग भी कर रहे हैं। इनको लगा था अंसार रज़ा जैसा कोई 5 हजारी डिबेट करने आएगा जिसे जावेद साहब भिगोकर, फिर धो पटककर और अंत में निचोड़कर सूखा देंगे। लेकिन उल्टा हो गया। कमेंट्री करना और मैदान में उतरकर खेलना दोनो बातों में अंतर है। जावेद साहब इतने समय तक कमेंट्री कर रहे थे। एक मंच मिल जाता था जिसपर चढ़कर माइक पकड़ा हाथ मे और अपनी सुंदर शैली में कुछ भी बोलो बदले में सुनो तालियों की गड़गड़ाहट। उसमें आपसे क्रॉस क्वेश्चन करने वाला और आपके सवाल का जवाब देने वाला नहीं होता है। सिर्फ सुनने वाले लोग होते हैं। बड़ा ही आसान और मज़ेदार काम है। जावेद साहब के पास दो तरह के फैंस क्लब है। एक तो उनके लॉजिक का फैन और एक है उनके गीत उनकी रचनाओं का फैन.. गीत ग़ज़ल के फैंस पता नहीं कहाँ गए, लॉजिक के फैंस बड़ी संख्या में नज़र आ रहे हैं जो कल की डिबेट के बाद बौखलाए से शिकस्त महसूस किये घू...
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