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दुनिया जंग के मुहाने पर नहीं… बयानियों के जाल में क़ैद है

यह जो फिज़ा में एक बेचैनी सी तैर रही है, यह महज़ ख़बरों का शोर नहीं… बल्कि बयानियों की वो धुंध है, जिसमें हक़ीक़त की शक्ल धुंधली पड़ जाती है। कहा जा रहा है कि क्यूबा अंधेरों में डूब चुका है, अमेरिका ने उसकी सांसें रोक दी हैं, और रूस एक तेल से भरे जहाज़ के साथ मैदान में उतर आया है मानो बस एक चिंगारी बाकी है और दुनिया जंग-ए-अज़ीम की आग में झुलस जाएगी। मगर सवाल यह है कि क्या मंज़रनामा वाक़ई इतना सीधा और सादा है? क्यूबा की हालत बेशक नाज़ुक है। बरसों की पाबंदियां, कमज़ोर मआशियत और ईंधन की किल्लत ने वहां के निज़ाम-ए-ज़िंदगी को हिला कर रख दिया है। अस्पतालों की रौशनी मंद है, सड़कों पर सन्नाटा है, और अवाम एक गैर-यक़ीनी कल के साए में जी रही है। लेकिन यह तस्वीर एक-रुख़ी नहीं… यह मुकम्मल तबाही नहीं, बल्कि लंबे दबाव का नतीजा है, जिसे सनसनीख़ेज़ अल्फ़ाज़ में “अंधेरे में डूबा मुल्क” बना दिया गया है। फिर आता है रूसी जहाज़ का क़िस्सा, एक ऐसा बयानिया जिसे इस तरह पेश किया जा रहा है जैसे अमेरिका के पास दो ही रास्ते बचे हों: या तो जहाज़ रोके और जंग मोल ले, या उसे जाने दे और अपनी साख गंवा दे। हालांकि हक़ीक़...

हिंदुस्तानी सियासत में हलचल: मधु किश्वर के इत्तिहामात (Allegations) ने खड़ा किया बड़ा सवाल

हिंदुस्तानी सियासत (Politics) में अक्सर ऐसे लम्हात आते हैं जब कोई एक बयान पूरा मंजरनामा (Scenario) बदल देता है। हालिया दिनों में एक ऐसा ही बयान सामने आया है, जिसने न सिर्फ़ सियासी हलकों में हलचल पैदा कर दी है, बल्कि अवाम (Public) के दरमियान भी गहरी बहस छेड़ दी है। मधु किश्वर, जो कभी हुकूमत के करीब मानी जाती थीं और एक खास सियासी तफक्कुर (Ideology) की हामी रही हैं, उनके ताज़ा इज़हारात (Statements) ने कई सवालात को जन्म दिया है। उन्होंने अपने बयान में कुछ संगीन इत्तिहामात (Serious Allegations) पेश किए हैं, जिनमें शख्सियाती और सियासी दोनों पहलुओं का ज़िक्र मिलता है। अहम बात ये है कि ये इत्तिहामात किसी अदालती फैसले या मुस्तनद (Verified) तहक़ीक़ (Investigation) से साबित नहीं हुए हैं, बल्कि एक शख्सी तजुर्बे और राय (Opinion) के तौर पर सामने आए हैं। लेकिन सियासत की दुनिया में अक्सर राय भी एक ताक़तवर अस्लाह (Weapon) बन जाती है, जो अवामी ज़ेहन (Public Mind) को मुतास्सिर करती है। ये मामला सिर्फ़ एक शख्स या एक बयान तक महदूद नहीं है, बल्कि ये उस बड़े मसले की तरफ इशारा करता है जहाँ सियासी शख्सियात (Po...