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Showing posts with the label तनहा

ये नहीं हैं के सुनता नहीं हूँ मैं।

ये नहीं है के सुनता नहीं हूँ मैं, बस कुछ बोलता नहीं हूँ मैं हैं तुझमे लाख ख़ामियां पर, उनपे कुछ कहता नहीं हूँ मैं! जो आ रहा कुचलता जा रहा, देखके चलो, रस्ता नहीं हूँ मैं! खुदी से मिर...

बादे-नौ-बहार चली, आ गयी हैं अब होली

बाद-ए-नौ-बहार चली आ गयी हैं अब होली, खिली हैं हर एक कली आ गयी हैं अब होली सभी लोग मस्त हैं, अब नाचते हैं गाते हैं तुम भी झूमो अपनी गली आ गयी हैं अब होली रंग भी बिखरते हैं, बिखरते हैं ...

तनहा

इश्क़ में हैं गुज़रे हम तेरे शहर से तनहा, महब्बत के उजड़े हुए घर से तनहा! हम वो हैं जो जीये जिंदगी भर से तनहा, और महशर में भी जायेंगे दहर से तनहा! तख़्लीक़े-शेर क्या बताऊ कितना गराँ है...

जिंदगी की तल्खियों पर तारिक़ अज़ीम 'तनहा' का कलाम पढ़े।

सोज़िशे-दयार से निकल जाना चाहता हूँ, हयात से अदल में बदल जाना चाहता हूँ! तन्हाई ए उफ़ुक़ पे मिजगां को साथ लेके, मेहरो-माह के साथ चल जाना चाहता हूँ! आतिशे-ए-गुज़रगाह-ए-चमन से हटकर, खुन...

मेरी जिंदगी के हक़ में ऐसी,....

मेरी जिन्दगी के हक़ में ऐसी सदा ना दे, तू मिले ना मौत भी आये ऐसी दुआ ना दे! मेरी दोस्ती आफताब से हैं मगर डर ये हैं, कहीं इसकी आतिश दामन को जला ना दे! तारिक़ अज़ीम 'तनहा'