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Showing posts with the label तारिक़ 'तनहा'

हुक़ूमत तेरे पाँव में ज़ंज़ीर हम डाल कर के रहेंगे।

क़ुरआन, इस्लाम, हदीस तो आसमानी हैं, तिरी हुक़ूमत तो बस पांच दिन की कहानी हैं! मिटा भी सकते हैं तिरी हुक़ूमत को हम सब, अगर हम ये सोच ले की हुक़ूमत मिटानी हैं! फ़ाक़ा करके भी रहे हैं जिन्द...

दास्तान-ए-तनहा

वादा निभाएंगे कोई जबाने-बदल थोडाई हैं, ये मज़ार-ए-'तनहा' हैं ताजमहल थोडाई है! फूंकूँगा मैं इसमें अपनी जान और लहू दोनों, एक किताब लिखूंगा कोई ग़ज़ल थोडाई हैं!

रंग

यूँ फेंककर रंग आसमान की तरफ, आसमान को रंगीन किया हैं हमने! 'तनहा' तारिक़

नज़र आते हैं..

पहाडो-आसमा पे तारे नज़र आते हैं, जलते और बुझते  सारे नज़र आते हैं! पहाड़ो-आसमा:- पहाड़ और आसमा हमारी गवाही लोग दे मुमकिन कहाँ. सब तरफदार तुम्हारे नज़र आते हैं! परेशान हैं सब अब दर्दे-...

Bezaar Hu....

युही हर इक के दिल में खार हूँ, सच पे ही लिखने को तैयार हूँ! खार-काँटा चंद पलो में बिक जाता हैं झूठ, और मैं सच को लेके बेज़ार हूँ! बेज़ार-दुखी

दुल्हन बन के.....

इक दफा दुल्हन बन के आ, जिस्म-ए-मिलन बनके आ! हिना ओ सिंगार सब करना, जिंदगी का चमन बनके आ! दीदा र हो और  मिले मौ त, लहंगा-ए-कफ़न बनके आ! काफिले का  पड़ाव चाहिये, सफर-ए-नशेमन बन के आ! तुझे दे...

दुल्हन बन के......

इक दफा दुल्हन बन के आ, जिस्म-ए-मिलन बनके आ! हिना ओ सिंगार सब करना, जिंदगी का चमन बनके आ! दीदा र हो और  मिले मौ त, लहंगा-ए-कफ़न बनके आ! काफिले का  पड़ाव चाहिये, सफर-ए-नशेमन बन के आ! तुझे दे...