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परे हैं दुनिया...

तेरी, मेरी, सबकी समझ से परे हैं दुनिया, कि मतलब के लिए कितना गिरे हैं दुनिया! हर चाराग़रो-गमख्वार गुरेज़ बना हैं अब तो, लिए दस्ते-शमशीर कातिल दिखे हैं दुनिया। कातिल, मक्कार, फरेब ...