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विश्व धनी जगत सेठ और अंग्रेज़ी हुक़ूमत

अपने समय में विश्व का सबसे धनी व्यक्ति जगत सेठ  """""""""""""""""""""""""""""""" मुर्शिदाबाद में नवाब सिराजुद्दौला के समय एक जगत सेठ हुआ करते थे नाम था फतेहचंद , वह मारवाड़ी थे वह अपने समय में विश्व के सबसे धनी व्यक्ति थे , हुंडी व सूद पर क़र्ज़ का कारोबार करते थे ,उनका कारोबार पूरे उत्तर भारत में फैला हुआ था  राजा महाराजा नवाब उन से कर्ज लिया करते थे ईस्ट इंडिया कंपनी ने भी उनके पैसों के सहारे ही भारत में क़दम जमाए थे वह ईस्ट इंडिया कंपनी को भी कर्ज देते थे  उनके पास कितनी दौलत थी  इस का अंदाज़ा नहीं लगाया जा सकता खुद अंग्रेजों का कहना था कि उनकी दौलत ब्रिटेन की कुल जीडीपी से ज़्यादा है  आगे चलकर उन पर राजनीति सवार हुई , नवाब सिराजुद्दौला के विरुद्ध मीर जाफर को खड़ा कर दिया, फिर मीर जाफर की हत्या करा कर उनके भतीजे मीर कासिम को नवाब बना दिया फिर मीर कासिम को भी उनके बच्चों के साथ कत्ल करवा दिया  शुरू में अंग्रेज देखत...

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दक्षिण अफ्रीका से भारत आये मुझे ढाई साल हो चुके हैं।  इसका चौथाई समय मैनें भारतीय रेलों के  तीसरे दर्जे में सफर करते गुजारा है। यह मेरी चॉइस थी, जिससे आम भारतीय यात्रियों से मिलने, बात करने का अवसर मिलता है। लाहौर से कलकत्ता और कराची से केरल तक सफर किया, और भारत के सभी रेलवे सिस्टम में यात्रा कर चुका हूँ। उनके अफसरों को यात्रियों की अवस्था पर कई पत्र भी लिखे हैं। अब वक्त है कि यह बात प्रेस और जनता तक भी पहुचाई जाये।  इस महीने 12 तारीख को मैनें बॉम्बे से मद्रास का टिकट लिया, जिसमे 13 रुपए 9 आने चुकाए। डिब्बे में 22 यात्रियों के लिए सिर्फ बैठने की सीट थी।  मुझे दो रातों का सफर करना था, लेकिन शायिका नही थी। पूना आते आते 22 लोग भर चुके थे, लेकिन इसलिए कि कुछ तगड़े लोग औरों को घुसने नही दे रहे थे। बैठे बैठे हम कुछ सो पाए,  पर रायचूर के बाद स्थिति गम्भीर हो गयी। लोग घुसते गए। रोकने वालों को रेलवे के आड़े हाथों लिया और डिब्बे में पैसेंजर ठूंस दिए। एक मेमन व्यापारी ने ज्यादा विरोध किया तो कर्मचारियों ने पहले उसे पकड़कर इन्सल्ट किया, फिर टर्मिनल आने पर अफसरों को सौप दिया। ज...