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Showing posts with the label poetry in urdu

इन्साफ कब होगा।

बादशाह ओ औलिया को ढूंढता हूँ मैं, हकपरस्त ए हुक़ुमरां को ढूंढता हूँ  मैं! दयारे-नसीम-ऐ-कानून हर सू चले, ऐसी  ही चमन ए फ़िज़ा ढूंढता हूँ मैं! वकारे-सू-ए-दारे-अहले-सिपाही, औरंगज़ेब  अ...

चंद अश्आर

(1) मैदाने-हश्र को भूल गए हम मसरूफ होकर, इस जिंदगी को ऐसे मसरूफ़ होकर ना गुज़ारो! (2) अब अपने कदमो पे भी यकीन ना रहा मुझे, उतरा हूँ आज सीढ़ियों से तो दीवार का सहारा लेकर! (3) मिरी दास्ताने-म...