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Showing posts with the label तन्हाई शायरी

ये नहीं हैं के सुनता नहीं हूँ मैं।

ये नहीं है के सुनता नहीं हूँ मैं, बस कुछ बोलता नहीं हूँ मैं हैं तुझमे लाख ख़ामियां पर, उनपे कुछ कहता नहीं हूँ मैं! जो आ रहा कुचलता जा रहा, देखके चलो, रस्ता नहीं हूँ मैं! खुदी से मिर...

तनहा

इश्क़ में हैं गुज़रे हम तेरे शहर से तनहा, महब्बत के उजड़े हुए घर से तनहा! हम वो हैं जो जीये जिंदगी भर से तनहा, और महशर में भी जायेंगे दहर से तनहा! तख़्लीक़े-शेर क्या बताऊ कितना गराँ है...

दास्तान-ए-तनहा