Skip to main content

Posts

Showing posts with the label muhabbat

परे हैं दुनिया...

तेरी, मेरी, सबकी समझ से परे हैं दुनिया, कि मतलब के लिए कितना गिरे हैं दुनिया! हर चाराग़रो-गमख्वार गुरेज़ बना हैं अब तो, लिए दस्ते-शमशीर कातिल दिखे हैं दुनिया। कातिल, मक्कार, फरेब ...

Ye tera Lab-E-...

ये तेरा लबे-जुम्बिशे-इकरारे-मुहब्बत, सरसब्ज़ कर गया मिरे बागे-दिल को! तारिक़ अज़ीम 'तनहा'