अमरीकी क़ुदरत-ए-सियासत: डोनाल्ड ट्रम्प, आलमी फ़ौजी अड्डे और जियोपॉलिटिक्स (Geopolitics) का ख़तरनाक खेल
दुनिया की तारीख़ में कई ऐसे मराहिल (Phases) आए हैं जब किसी अज़ीम ताक़त की क़ियादत एक ऐसे शख़्स के हाथ में चली गई जिसकी सियासी हिकमत-ए-अमली ने पूरी दुनिया को बेचैनी और तश्वीश में मुब्तला कर दिया। आज की आलमी सियासत में अगर किसी शख़्सियत को लेकर इस किस्म की बहस सबसे ज़्यादा मौजूद है तो वह डोनाल्ड ट्रम्प हैं। ट्रम्प की सियासी तर्ज़-ए-फ़िक्र (Political Thinking) और उनकी आलमी पॉलिसी को देखकर कई तजज़िया निगार यह सवाल उठाते नज़र आते हैं कि क्या अमरीका अपनी क़ुदरत (Power) को महज़ तहफ़्फ़ुज़ के लिये इस्तेमाल कर रहा है या फिर यह पूरी दुनिया पर मुआशियाती और सियासी ग़लबा कायम रखने की कोशिश है। ट्रम्प की सियासत का एक अहम पहलू टैरिफ जंग (Tariff War – व्यापारिक शुल्क युद्ध) रहा है। उन्होंने यह तसव्वुर पेश किया कि दुनिया के कई मुल्क सदियों से अमरीका की मुआशियात से फ़ायदा उठा रहे हैं और अब वक़्त आ गया है कि अमरीका अपने तिजारती मफ़ादात को सख़्ती से दिफ़ा करे। मगर जब यह टैरिफ जंग चीन जैसे अज़ीम मुआशियाती ताक़त के साथ टकराई तो यह सिर्फ़ एक तिजारती मसला नहीं रहा बल्कि जियोपॉलिटिक्स (Geopolitics – आलमी सियास...