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Showing posts from September, 2026

One Line Famous Sher | Tariq Azem Tanha

    ऐसे बहुत से अशआर हैं, जिनका एक ही मिसरा इतना मशहूर हुआ कि लोग दूसरे मिसरे को तो भूल ही गये। ऐसे ही चन्द मशहूर अशआर यहाँ पेश हैं:   "ऐ सनम वस्ल की तदबीरों से क्या होता है, *वही होता है जो मंज़ूर-ए-ख़ुदा होता है।*"   *- मिर्ज़ा रज़ा बर्क़*   "ऐ 'ज़ौक़' देख दुख़्तर-ए-रज़ को न मुँह लगा, *छूटती नहीं है मुँह से ये काफ़िर लगी हुई।"*   दुख़्तर-ए-रज़ = शराब   *- शेख़ इब्राहीम ज़ौक़*   "भाँप ही लेंगे इशारा सर-ए-महफ़िल जो किया, *ताड़ने वाले क़यामत की नज़र रखते हैं।"*   *- माधव राम जौहर*   "चल साथ कि हसरत दिल-ए-मरहूम से निकले, *आशिक़ का जनाज़ा है, ज़रा धूम से निकले।"*   *- मिर्ज़ा मोहम्मद अली फिदवी*   "दिल के फफूले जल उठे सीने के दाग़ से, *इस घर को आग लग गई,घर के चराग़ से।"*   *- महताब राय ताबां*   "ईद का दिन है, गले आज तो मिल ले ज़ालिम, *रस्म-ए-दुनिया भी है,मौक़ा भी है, दस्तूर भी है।"*   *- क़मर बदायुनी*   "ख़ंजर चले किसी पे, तड़पते हैं हम 'अमीर', *सारे जहा...