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Happy Teachers Day

ये उस्तादीयत भी बड़ा ज़िम्मेदाराना काम है कसम से....  हम ने अपने उस्ताद ए मुहतरम को इस ज़िम्मेदारी से थकते नहीं देखा, वे बड़े सहज सरल इंसान हैं जिन्होंने शागिर्दों को बेटे से भी बढ़कर जगह दी है और हम भी उनकी इस करमफ़रमाई को ख़ुदा की नेमत से बढ़कर मानते हैं लेकिन हमारे दौर के बाद के शागिर्द उस्ताद को कुछ नहीं समझते, लिया फोन कभी इसे चटकाया कभी उसे..... जब पूछो तो उस्ताद कौन हैं तो कोई कहेगा फलां थे 6 महीने पहले उनसे 2 महीने पहले फलां थे, अब कोई नहीं है बस इधर उधर कर लेते हैं बाक़ी गूगल से काम चल जाता है इसके अलावा कुछ कहते है कि ये भी उस्ताद है वो भी है जब दोनों नहीं तो फलां  हैं कोई नहीं तो हम स्वयं हैं। दस जगह मिसरे सुधरवाएँगे,  और सफलता का क्रेडिट किसी बेबहरे सयोंजक को देंगे या खुद को.... वाहः भई वाहः क्या शागिर्द हैं ? एक वो ज़माना था उस्तादों की चौपाल पर शागिर्द दरी बिछाते थे, इज़्ज़त करते थे आज तो कोई उस्ताद को नहीं समझता कुछ।  लेकिन जब टीचर डे होगा तो पोस्ट ऐसे चिपकाए फिरते हैं कि यही अर्जुन हैं, कई तो 10 -12 गुरु की फ़ोटो चेंप देते हैं। कुछ उस्तादों ने भी ये नया नियम बना ल...