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Kashti Chahe To Zameen Pr Bhi Chal Sakti Hai

कश्ती चाहे तो ज़मीं पर भी चल सकती है, तेरी हस्ती ही तेरी किस्मत को बदल सकती है। मैंने जिस उम्मीद से तेरी तस्वीर को देखा है मेरे यार, मुझको खदशा है ये बाहर भी निकल सकती है। जो रहती हर लम्हा अब हैरां सी मेरी तस्वीर, ग़म के आगोश में आकर ये सम्भल सकती है। है उसको इज़ाज़त की वो चाहे तो आ सकता है, है शाम की ज़ीस्त की वो चाहे तो ढल सकती है। है मेरा मुक़द्दर की दश्त-ओ-सेहरा में हो क़याम, है मेरी ही तक़दीर की चाहे तो बदल सकती है। पैराहन शादमा है 'तनहा' इस कदर के आज, कोई लड़की हमपे भी फिसल सकती है। तारिक़ अज़ीम 'तनहा'
  तो आप शाइरी सीखना चाहते हैं? अब ये कोई सिलेबस को पढ़ने की तरह सीधा सीधा काम होता तो हर साल शाइर झुँड में ग्रैजुएट होते। पर ऐसा भी नहीं कि ये इतना मुश्किल है। मुश्किल यहाँ शाइरी के नियम कतई नहीं हैं, बल्कि मुश्किलात नियम सीखने के बाद अपने अंदर शाइरी लाने की है। ज़्यादातर लोगों के अंदर शाइरी जाना ही नहीं चाहती। ऐसा इसलिए क्यूँकि वो अकेले नहीं जी सकते, वो अपने आप से बाहर दुनिया नहीं देख सकते, ज़्यादातर लोग बस लोग होते हैं, शाइर नहीं। हर आदमी जिसको ये लगता है कि उसके लिए सबसे ज़रूरी आदमी वो खु़द है, वो कभी शाइरी नहीं कर सकता। न ही वो कर सकता है जिसे आज तक मालूम ही नहीं चला कि उसे महसूस होता क्या है और क्या नहीं। कुछ ऐसे भी लोग हैं जिन्होंने शाइरी के नियम तो जान लिए पर शाइरी की समझ कभी न पा सके। पर उन्होंने हार नहीं मानी, वो शेर कहते रहे। मुझे ऐसे लोग निहाँ फिज़ूल लगते हैं। अगर आपको पता चलता है कि आप कभी शाइर नहीं हो सकते तो क्यों मानव जाति का वक्त बर्बाद कर रहे हैं, हराम की ज़िन्दगी की तलब़ क्यों है आपको। जाइए कुछ और रोज़गार देखिए।  खैर जिन लोगों को ये जानना है कि शाइरी कब की जा...

उर्दू तुकांत शब्द भाग 1

  अक़्ल   = बुद्धि, तर्क, ज्ञान, मति, प्रज्ञा, मस्तिष्क, ज्ञान, अकबर  = सबसे महान, महानतम, महत्तम, अकसर  = अधिकतर, बहुत बार, बहुधा, विशेषकर, प्रायः, लगभग, सदा, सर्वदा, अख्ज़  = पकड़नेवाला, लेनेवाला, छीनने वाला, लोभी अख़बार  = समाचार, समाचारपत्र, वृत्तपत्र, वर्तमान पत्र, सामयिक पत्र, अगर  = यदि, तथापि, अग्यार  = अजनबी, प्रतिद्वन्दी (गै़र का बहुवचन) अगल़ात  = अशुद्धियां (गल़त का बहुवचन) अर्जमन्द  = महान अऱ्ज  = धरती, क्षेत्र, पृथ्वी अजनबी  = आगंतुक, विदेशी, परदेसी, अपरिचित, अज़ल  = अनन्तकाल, सनातनत्व, नित्यता अजब  = कौतुक, आश्चर्य, असाधारण, अजीब  = आश्चर्यजनक, अद्भुत, निराला अज़ाब  = पीड़ा, सन्ताप, दंड अज़ीज़  = प्रिय, माननीय, आदरणीय, गुणवान अज़ीम  = महान, विशाल, उच्च मर्यादा वाला अटक  =विघ्न, बाधा अत्त्फ़ाल  = बच्चे, संतति (तिफ़्ल का बहुवचन), संतान, पुत्र-पुत्रियाँ, अत्फ़  = दया, भेंट, प्रेम, कृपा अदा  = ऋण चुकाना, अदा  = मनोहरता, श्रृंगार, सुन्दरता, अभिनय, अदीब  = विद्...