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जंग की नई सूरत: लंबी जंग, सख़्त निज़ाम और बढ़ती आग का बयानिया

कुर्सी की पेटी बाँध लीजिए, क्योंकि जो मंजर अब उभर रहा है, वह किसी जल्द ख़त्म होने वाली जंग का नहीं, बल्कि एक तवील (Long) और पेचीदा मरहले (Phase) की इब्तिदा (Beginning) है। फ़िज़ा में जो तनाव है, वह ठहरने के बजाय हर गुज़रते लम्हे के साथ और शदीद होता जा रहा है, और हालात यह इशारा दे रहे हैं कि अब यह टकराव एक मुकम्मल जंग (Full-scale Conflict) की शक्ल इख़्तियार कर सकता है। ईरान ने अपने अम्नी निज़ाम (Security Structure) के अहम चेहरों की हलाकत (Elimination) को तस्लीम (Accept) कर लिया है, और इसके साथ ही यह पैग़ाम भी दे दिया है कि जवाब ज़रूर आएगा—और वह पहले से कहीं ज़्यादा सख़्त और असरअंदाज़ होगा। मगर इस पूरे वाक़िये का असल पहलू यह है कि इन नुक़्सानात (Losses) के बावजूद ईरान की फौजी मशीनरी (Military Machine) में कोई इन्किसार (Collapse) नज़र नहीं आता। इसकी वजह साफ़ है यह निज़ाम अफ़राद (Individuals) पर नहीं, बल्कि एक मुकम्मल ढांचे (System) पर क़ायम है, जिसकी मिसाल Islamic Revolutionary Guard Corps जैसे इदारों से मिलती है, जहाँ हर ओहदे के लिए मुनासिब जानशीन (Successor) पहले से तय होता है। यानी यहा...