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सिनो हक़ीक़त बनाम हिंदुस्तानी तखय्युल: तामीर (Development) की दौड़ में हम कहाँ खड़े हैं?

चाइना हमसे कितना आगे है, 50 साल, सौ साल या 500 सौ साल? जो लोग टीवी को ज्ञान और खबरों का श्रोत मान लिए वे न सिर्फ अपना बल्कि अनजाने में इस देश और आने वाली पीढ़ी का भविष्य खराब कर रहे हैं।

सच तो यह है कि हमारी सरकार कुछ कर ही नहीं रही है सिवाय टीवी शोज और प्रोपेगंडा के। इस टीवी शो और प्रोपेगंडा के सबसे बड़े ग्राहक अंधभक्त है, ऐसे अंधभक जो आज भी इस भ्रम में जी रहे हैं कि केवल टीवी पर बकलोली करने से, नारा गढ़ने, प्रोपेगंडा और नैरेटिव बनाने से देश आगे बढ़ सकता है।

लेकिन सच्चाई यह है कि आज के समय में वही देश आगे बढ़ रहा है, जो धर्म जाती और नफरत की राजनीति से बाहर निकल कर, अंधविश्वास और पाखंड से बाहर निकल कर विज्ञान, टेक्नोलॉजी, रिसोर्स डेवलपमेंट, स्किल्ड डेवलपमेंट, वर्कफोर्स और मजबूत शिक्षा व्यवस्था पर काम कर रहा है। चीन इसका सबसे बड़ा उदाहरण है।

आज अगर आप बाजार में जाएं, किसी भी इलेक्ट्रॉनिक सामान चाहे वह मोबाइल हो, कंप्यूटर हो या उनके चिप हो, उसको देखें, तो उसमें ज्यादा से ज्यादा चीन के सामान मिलेंगे। चीन ने क्या कुछ नहीं किया है, इंसान की जरूरतों के लिए हर एक सामान का एडवांस लेवल पर रिसर्च, डिजाइन, और प्रोडक्शन किया है..

आप खाड़ी के देशों में काम करने वाले लोगों से चीन के विज्ञान, टेक्नोलोजी और रिसोर्स के बारे में बात कीजिए, तब पता चलेगा कि चीन कहां है और हम कहां हैं।

जहाँ पहले अलग अलग देशों की कंपनियाँ काम करती थीं, अब धीरे धीरे चाइनीज कंपनियाँ बड़े प्रोजेक्ट्स ले रही हैं, चाहे वह ऑयल एंड गैस सेक्टर हो, प्लांट इंडस्ट्री हो या मैकेनिकल और इंस्ट्रूमेंटेशन से जुड़ा काम, या केमिकल इंडस्ट्री हो, इतना ही नहीं,
घर की कुर्सी टेबल से लेकर कप प्लेट, हॉट पोट, ऑफिस के फर्नीचर तक, हर जगह “Made in China” आम हो चुका है।

चीन की ताकत क्या है?
• मजबूत मैन्युफैक्चरिंग सिस्टम
• टेक्नोलॉजी में लगातार निवेश
• स्किल्ड वर्कर्स
• रिसर्च और डेवलपमेंट पर फोकस
• और सबसे जरूरी काम करने की गति और अनुशासन

आज चीन केवल सामान ही नहीं बना रहा, बल्कि
डिफेंस टेक्नोलॉजी, रडार सिस्टम, और आधुनिक हथियारों में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है।

और हम कहाँ खड़े हैं? किसके पीछे खड़े है? हमारा पीएम काम करने के बजाय मंदिर मस्जिद में व्यस्त है। खुद भी व्यस्त है और लोगों को भी हिंदू मुस्लिम मंदिर मस्जिद के झमेले में उलझा कर रखा है। हमारे यहाँ अब भी ज्यादातर समय फालतू के बहसों, अफवाहों, अंधविश्वास और बेकार की बातों में निकल जाता है।

असल मुद्दों जैसे कि शिक्षा, स्किल डेवलपमेंट, टेक्नोलॉजी और इंडस्ट्री पर जितना ध्यान होना चाहिए, हम बहुत कम सोच पाते हैं। हमारे यहां बेवकूफ बनाने की फैक्ट्री है, जो खूब फल फूल रही है। 

इसी दुनियां में चाइना भी है जो निरंतर आगे बढ़ रहा है और इसी दुनियां में एक हम हैं जो अपनी औकात की तुलना पाकिस्तान से करते हैं।

आज एक डॉलर की कीमत 6.90 Chinese Yuan है 
एक डॉलर की कीमत 93.52 रुपए है, एक सऊदी रियल की कीमत 1.84 Chinese Yuan एक सऊदी रियाल का कीमत 24.92 इंडियन रूपीज है, रुपए और डॉलर की वैल्यू का कंपेयर कर लें तो आपको पता चलेगा कि इस "रुपए और युआन" के गैप को भरने में हमे कितने हजार साल लगेंगे.. बकलोली करने में तो हम आगे हैं, चाइना तो इसमें कहीं भी नहीं हैं, लेकिन टेक्नोलॉजी में हम कहां है?

चाइना का मैन्युफैक्चरिंग स्पीड हमसे 500 साल आगे निकल चुका है, और हम जैसे बेव कू.. लोग जो पुष्पक विमान बनाने वाले, हाथी का सिर मनुष्य में फिट करने वाले तथाकथित वैज्ञानिक लोग जमीन पर आज भी रेंग रहे हैं।

कभी मौका मिले तो चाइना के बारे में स्टडी कीजियेगा, जिस इंडस्ट्री के लिए हमारी सरकारें तक नहीं सोच पाती, चाइना में फुट पाथ से खड़ी छोटी मोटी कंपनी खड़ा कर देती है, घर घर में काम हो रहा है, लोग और देश आगे बढ़ रहा है।

प्लांट में एक मैनेजर से हमारी बात हो रही थी, बात चीत में ये बात निकल कर आया कि चाइना लोगों की जिंदगी आसान बनाने के लिए ग्राउंड लेवल पर काम कर रहा है, किचन से लेकर, हॉस्पिटल तक, स्कूल से लेकर हथियार तक वह सारे निर्माण ऐसे कर रहा है जैसे वो इस सब्जेक्ट में पीएचडी हो और हम सभी एबीसीडी भी ठीक से न सीख पाए हों। बकलोली करने के लिए किसी को भी टीवी पर बैठा लीजिए, कैमरे के सामने कुछ भी बकवा लीजिए, मगर जमीनी सच्चाई बिल्कुल अलग है।

अमेरिका के बारे में ये बात है कि उसके प्रोडक्ट हम आम इंसानों के काम नहीं आती, वह इस पर फोकस भी नहीं करता, उसका फोकस है अत्याधुनिक हथियार बनाने, बेचने और दूसरों को लड़ाकर अपना उल्लू सीधा करने। प्लांट, इंडस्ट्री और लड़ाकू हथियार बनाने में उसके यहां बहुत अच्छे लेबल पर काम होता है, बकलोली सिर्फ हमारे यहां का धंधा है।

कुछ पत्तलकर टीवी पर बैठ कर उल जुलूल बातें करके जनता को गुमराह करते रहते हैं, एक पत्तलाकर कुछ महीने पहले ट्रंप का गुणगान कर रहा था, ट्रंप ने जब लतियायाना शुरू किया पलटी मार कर जिन पिंग का गुणगान करने लगा, गोदी मीडिया को देखकर यह बात तो स्पष्ट हो गई कि भारत को बर्बाद करने में अगर सबसे बड़ी भूमिका किसी की है तो नेताओं से ज्यादा गोदी मीडिया की है।

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China vs India development
manufacturing China analysis
technology growth China
India economy analysis
industrial growth comparison
China manufacturing system
global economy comparison
skill development workforce
geopolitics economy Asia
industrialization China

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