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क्या भारत को जंग में घसीटा जा रहा है? हिन्द महासागर की बड़ी घटना

सदियों में जो ना हुआ वो हो गया , 
कल अमेरिका ने ईरान के युद्धपोत IRIS DENA को श्रीलंका के पास   डुबो दिया , जिसमें 100-150 ईरान के सैनिक मारे गए , 

वहीं भारत में बहस छिड़ गई कि ये ईरान का युद्धपोत भारत द्वारा आयोजित इंटरनेशनल फ़्लीट रिव्यू और  MILAN -2026 के नौसैना अभ्यास के लिए आया था और विशाखापट्टनम से निकलने के बाद श्रीलंका के पास अमेरिका ने पनडुब्बी से उड़ा दिया जो कि भारत का मेहमान था , भारत की जिम्मेदारी बनती है , 

शायद ये बहस भारत की नैतिक जिम्मेदारी की हो रही है वहीं लोग कह रहे हैं भारत की जल सीमा 12 NM पर खत्म हो जाती है क्योंकि 12 NM से आगे अंतराष्ट्रीय जल सीमा चालू हो जाती है , 

अब मुद्दे पर आते हैं , क्या भारत की जल सीमा 12 नॉटिकल मील है ?? 

क्या भारत की जिम्मेदारी 12 नॉटिकल मील दूर खत्म हो जाती है ?? 

आपको जानकारी दुरुस्त करना चाहता हूँ किसी देश की जमीन से 12 समुद्री मील की दूरी तक उसका टेरिटोरियल क्षेत्र होता है जो कि सही है , 

अब बात जिम्मेदारी की आती है तो भारत हिन्द महासागर में 12 समुद्री मील तक सीमित नहीं है , 

भारत हिन्द महासागर का “नेट सिक्योरिटी प्रोवाइडर” है जो कि हिन्द महासागर में सुरक्षा प्रदान करता है , 

भारत का दायरा 30 डिग्री South लैटीट्यूड तक है , मैंने फोटो में भर  का दायरा अंकित किया है जिससे आपको समझने में आसानी होगी , 

इस दायरे में आने वाले मछली बोट से लेकर बड़े जहाजों की सुरक्षा की जिम्मेदारी भारत की है , इस दायरे में आने वाले सभी जहाजों से भारत की नौसेना संपर्क कर के पूछताछ भी कर सकती है , संदेह होने पर जांच भी कर सकती है , 

इस एरिया में घुसने पर भारतीय कोस्ट गार्ड्स को रिपोर्ट किया जाता है , इसे INSPIRES कहा जाता है मतलब Indian Ship Position and Information Reporting system जो कि हिन्द महासागर में     दक्षिण में 30* South लैटीट्यूड , पूर्व में इंडोनेशिया तक और पच्छिम मेंअफ्रीका तक फैला हुआ है , 

इतने बड़े दायरे को संभालना भारत के लिए गर्व की बात तो है ही पर साथ ही जिम्मेदारी की भी बात है , 

आपको अंदाज़ा भी नहीं होगा कि भारत नेट सिक्योरिटी प्रोवाइडर होने  के नाते मॉरीशस,  सेशेल्स, मालदीव की सुरक्षा भी करता है , 

वहीं कोलंबो सिक्योरिटी कॉनक्लेव (CSC) के ज़रिए भारत श्रीलंका और मालदीव का समूह है , जिसमें भारत सुरक्षा को लीड करता है 

अब अगर अमेरिका भारत के सुरक्षा वाले दायरे में ईरान के युद्धपोत को मार गिराता है तो भारत की नौसेना की जिम्मेदारी है और जवाबदेही बनती है , 

अभी तक युद्ध मिडल ईस्ट में चल रहा था , भारत के प्रभुत्व वाले दायरे में कोई ऐसी  हिमाक़त नहीं करता था , पर अमेरिका ने ऐसा किया , 

अमेरिका ने जानबूझ कर ऐसा किया है जिससे भारत भी युद्ध में कूद जाए , 

पहले तो अमेरिका ने Protocol of hospitality का उल्लंघन किया , जब ईरान का युद्धपोत भारत से वापस जा रहा था तो उसे ऐसा नहीं करना चाहिए था , 

दूसरा भारत द्वारा वापस जाते युद्धपोत भारत की नौसेना के संपर्क रहते हैं  साथ ही निगरानी भी रहती है , 

मतलब भारत की नौसेना की नज़र युद्धपोत पर थी लेकिन फिर भी उड़ गया ,  ये तो बिल्कुल ऐसा हुआ जैसे कि मेहमान आपकी गली में है और आप कह रहे हैं हमारे घर के दरवाज़े से बाहर है तो हमारी ज़िम्मेदारी नहीं है , ज़िम्मेदारी है और रहेगी भी , 

समंदर के अंदर भी निगरानी रखी जाती है , कैसे अमेरिका की पनडुब्बी उतना क़रीब आकर अपना मिशन पूरा कर लेती है ?? 

कल चीन अपनी पनडुब्बी भारत की सीमा से 12 नॉटिकल मील दूर खड़ी हो जाये और भारत की नौसेना को पता ना चले तो क्या होगा सुरक्षा का ??? या क्या होगा देश का ?? 

इसलिए ये कहना कि ईरान का युद्धपोत भारत की 12 नॉटिकल मील दूर अंतराष्ट्रीय जल सीमा में था वो बचकाना बयान है , 

हाँ भारत की गलती नहीं है पर धोखा अमेरिका ने दिया है , उसे ऐसा नहीं करना चाहिए था , 

अब इस युद्ध में दो कांड ऐसे हुए हैं जिससे लग रहा है कि भारत को इस युद्ध में घसीटा जा सकता है , 

पहला मोदी जी के इजराइल यात्रा के तुरंत बाद ईरान पर युद्ध शुरू करना , 

दूसरा - भारत के प्रभुत्व और जिम्मेदारी वाले क्षेत्र में ईरान के युद्धपोत का अंत जिसमें उसके सैंकड़ों सैनिक मारे गए , 

अब ईरान ये समझ ले भारत अमेरिका से मिला हुआ है तो ईरान से रिश्ते में दरार आएगी , 

अपने सैनिकों के लिए ईरान भी भारत के व्यापारिक जहाजों पर निशाना साध सकता है , 

या ईरान का कोई सहयोगी देश ही भारत के व्यापारिक जहाज़ों को निशाना बना सकता है , ईरान भी कह देगा कि हमारा कोई लेना देना नहीं है ये हमारे 12 NM की दूरी से बाहर हुआ है , 

तब टेंशन बढ़ जाएगी भारत को इस युद्ध में उतरना पड़ सकता है , 

याद है प्रथम विश्वयुद्ध में अमेरिका 1917 में शामिल हुआ था जबकि प्रथम विश्वयुद्ध 1914 में शुरू हुआ था , 3 साल तक अमेरिका न्युट्रल रहा था फिर जब पनडुब्बियों ने अमेरिका के जहाजों को डुबोना शुरू किया तो 1917 में अमेरिका भी शामिल हो गया , 

वही हाल भारत का है , भारत न्यूट्रल है पर परिस्थितियाँ ऐसी पैदा की जा रही हैं कि भारत को ऐसी घटनाओं द्वारा इल्ज़ाम लगा कर भारत के व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाया जाये जिससे भारत अपने नागरिकों के हित के लिए युद्ध में उतर जाये , 

मेरे नजरिये से भारत को अमेरिका से दो टूक बात करनी चाहिए , अमेरिका की इस हिमाक़त की निंदा करनी चाहिए और ईरान के सैनिकों कि लाशों को ससम्मान ईरान पहुंचा कर अपनी नैतिक ज़िम्मेदारी निभानी चाहिए , 

युद्ध सिर्फ़ विनाश लाता है , भारत अभी उभर कर प्रगति कर रहा है ऐसे में किसी भी देश के चक्रव्यूह से दूर रहना चाहिए और किसी के बिछाए जाल में नहीं फँसना चाहिए , 

जय हिन्द ! 

तारिक़ अज़ीम तनहा

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