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अमेरिका युद्ध कैसे बेचता है? वियतनाम से इराक़ तक और ईरान में क्यों फँस सकता है


अमेरिका ने वियतनाम युद्ध, खाड़ी युद्ध और इराक़ युद्ध के दौरान अपनी जनता को युद्ध कैसे “बेचा”? इतिहास, मीडिया और ईरान संघर्ष का विश्लेषण।


अमेरिका अपनी जनता को युद्ध कैसे बेचता है?

आधुनिक राजनीति में युद्ध केवल रणभूमि में नहीं लड़ा जाता, बल्कि मीडिया, संस्कृति और जनमत के स्तर पर भी लड़ा जाता है। अमेरिका इसका शायद सबसे बड़ा उदाहरण है।
अमेरिका ने द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से ही विश्व राजनीति में अपनी ताक़त स्थापित करनी शुरू कर दी थी। पर्ल हार्बर के अलावा अमेरिकी मुख्यभूमि को बहुत कम नुकसान हुआ, जबकि यूरोप पूरी तरह तबाह हो चुका था। इसी आर्थिक और सैन्य बढ़त के कारण अमेरिका जल्दी ही एक वैश्विक शक्ति बन गया। इसके बाद परमाणु हथियारों का निर्माण और सोवियत संघ के साथ कोल्ड वॉर शुरू हुआ।

वियतनाम युद्ध और अमेरिकी समाज का विद्रोह
सब कुछ तब बदल गया जब अमेरिका वियतनाम युद्ध में फँस गया। यह वह युद्ध था जिसमें: बड़ी संख्या में अमेरिकी सैनिक मारे गए युद्ध लंबा और महँगा साबित हुआ अंततः अमेरिका को पीछे हटना पड़ा 1960 और 1970 के दशक में अमेरिका में एंटी-वॉर मूवमेंट तेज़ हो गया। संगीतकारों और कलाकारों ने भी इस युद्ध का विरोध किया। Bob Dylan, John Lennon और Creedence Clearwater Revival जैसे कलाकार युद्ध विरोधी आवाज़ बन गए। "Fortunate Son" और "Gimme Shelter" जैसे गीत उस समय के एंटी-वॉर एंथम बन गए। हॉलीवुड में भी युद्ध की भयावहता दिखाने वाली कई क्लासिक फिल्में बनीं जैसे:
The Deer Hunter (1978)
Apocalypse Now (1979)
Platoon (1986)
Full Metal Jacket (1987)
इन सबने मिलकर अमेरिकी समाज में युद्ध के खिलाफ गहरी भावना पैदा कर दी।

सोवियत संघ का पतन और अमेरिका का आत्मविश्वास

1991 में सोवियत संघ के पतन के बाद अमेरिका विश्व की एकमात्र महाशक्ति बन गया। यह जीत अमेरिका के लिए लगभग वैसी ही थी जैसे द्वितीय विश्व युद्ध में हिटलर की हार।
अब अमेरिका के सामने कोई बड़ा प्रतिद्वंद्वी नहीं था और उसके पास विशाल सैन्य शक्ति मौजूद थी।

खाड़ी युद्ध और “टीवी वाला युद्ध”

1991 में जब इराक़ के राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन ने कुवैत पर हमला किया, तो अमेरिका ने हस्तक्षेप किया। यह युद्ध कई मायनों में अलग था। यह पहला ऐसा युद्ध था जिसे दुनिया ने टीवी पर लाइव देखा। यहाँ CNN की भूमिका महत्वपूर्ण थी।
लोग अपने घरों में बैठकर मिसाइलों को गिरते हुए देख रहे थे।
इस तरह युद्ध को एक वीडियो गेम जैसा अनुभव बना दिया गया, जहाँ “स्मार्ट बम” और “प्रिसिशन स्ट्राइक” की बातें होती थीं और अमेरिकी सैनिकों के नुकसान की चर्चा कम होती थी।
इस कारण अमेरिकी जनता का युद्ध के प्रति दृष्टिकोण फिर से सकारात्मक होने लगा।

9/11 और “War on Terror

2001 में 9/11 हमलों के बाद अमेरिका ने “War on Terror” शुरू किया। पहले अफ़ग़ानिस्तान और फिर इराक़ पर हमला किया गया। शुरुआत में अमेरिकी जनता ने इन युद्धों का समर्थन किया। लेकिन धीरे-धीरे इराक़ युद्ध एक लंबे और महँगे संघर्ष में बदल गया। 8 साल तक चलने वाले इस युद्ध में:
भारी आर्थिक लागत हुई, बड़ी संख्या में सैनिक मारे गए,
अमेरिकी समाज में फिर से युद्ध विरोधी भावना बढ़ गई।

ड्रोन युद्ध का दौर
इसके बाद अमेरिका ने एक नई रणनीति अपनाई, ड्रोन युद्ध।
अब जमीन पर सैनिक उतारने के बजाय ड्रोन और विशेष ऑपरेशन के माध्यम से युद्ध लड़ा जाने लगा। इसका संदेश था:
“दुश्मन खत्म होगा, लेकिन अमेरिकी सैनिक नहीं मरेंगे।"

ईरान क्यों अलग मामला है

ईरान का मामला अलग है।
क्योंकि:
ईरान का भूगोल कठिन है (पहाड़ और रेगिस्तान)
उसके पास असिमेट्रिक वॉरफेयर की क्षमता है
क्षेत्र में उसके कई प्रॉक्सी समूह हैं इन कारणों से यदि अमेरिका ईरान के साथ पूर्ण युद्ध में उतरता है, तो यह लंबे और जटिल संघर्ष में बदल सकता है  कुछ हद तक वियतनाम या इराक़ की तरह।

तारिक़ अज़ीम तनहा


Focus Keywords:
America war strategy
Vietnam war public opinion
Iraq war analysis
Iran vs America conflict
war propaganda media


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