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Showing posts from December, 2017

इतराती तो हैं।

अदा, शोखी, नज़ाकत पर वो इतराती तो हैं, हुस्न के जलवो से परीवश नज़र आती तो हैं। कौन इस तर्जे-कुव्वत पर कश्ती पे करे नज़र, कश्ती छोटी हैं मगर तूफान से टकराती तो हैं। तारिक़ अज़ीम तनहा

Mirza Ghalib मिर्ज़ा ग़ालिब

ग़ालिब का जन्म 27 दिसंबर को आगरा में एक सैनिक परिवार में हुआ था। उन्होने अपने अब्बा और चाचा को बचपन में ही खो दिया था, ग़ालिब का जिंदगी अपने चाचा की मिलने वाली पेंशन से होता था!। ...

मेरी जिंदगी के हक़ में ऐसी,....

मेरी जिन्दगी के हक़ में ऐसी सदा ना दे, तू मिले ना मौत भी आये ऐसी दुआ ना दे! मेरी दोस्ती आफताब से हैं मगर डर ये हैं, कहीं इसकी आतिश दामन को जला ना दे! तारिक़ अज़ीम 'तनहा'

مہتاب لئے شمشیر مجھے دھندہ رہا ہیں اب تک 'Mahtaab Liye Shamsheer Mujhe Dhundh Raha Hain ab tak ۔ ۔ n

महताब लिए शमशीर मुझे ढूंढ रहा हैं अब तक, बस मेरा जुर्म ये है मेरे घर जलता दीया हैं अब तक अब इस तंगमयकशी पर क्यों ना मर मिटे जमाना, पैमाने में शराब नहीं मगर होठों से लगा है अब तक! य...

Koi Mujhme Aise Jaaga Kare Kyo..

कोई मुझमे ऐसे जागा करे क्यों, आँखों में क़याम किया करे क्यों! कोई रात भर रहे इन आँखों में, पलकों पर मेरी जला करे क्यों! रास हर जख्म हर दर का मुझे, बेबस जख्मो की दवा करे क्यों! वतन क...

Ameer Khusro अमीर खुसरो

हज़रते-अमीर खुसरो यानी हिंदी उर्दू के सबसे पहले कवि थे। इन्होंने जब अपनी सोच का पस-मंज़र खोला तो इन्होंने ये लिखा जो की आज कल बहुत मशहूर गीत हैं दमा-दम मस्त कलंदर, अली दा पहला नं...

Ameer Khushro अमीर खुसरो की कहानी।

हज़रते-अमीर खुसरो यानी हिंदी उर्दू के सबसे पहले कवि थे। इन्होंने जब अपनी सोच का पस-मंज़र खोला तो इन्होंने ये लिखा जो की आज कल बहुत मशहूर गीत हैं दमा-दम मस्त कलंदर, अली दा पहला नं...

परे हैं दुनिया...

तेरी, मेरी, सबकी समझ से परे हैं दुनिया, कि मतलब के लिए कितना गिरे हैं दुनिया! हर चाराग़रो-गमख्वार गुरेज़ बना हैं अब तो, लिए दस्ते-शमशीर कातिल दिखे हैं दुनिया। कातिल, मक्कार, फरेब ...