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Showing posts from October, 2017

दास्तान-ए-तनहा

मेरी किताब का कवर पृष्ठ अब मरके भी तुम सबमे जिन्दा रहूँगा, लिख रहा एक किताब दास्तान-ए-'तनहा'!!

दास्तान-ए-तनहा

सितारों तुम अब तो सो जाओ....

सितारों तुम अब तो सो जाओ के रात अभी बाकी है मुझे भी नींद आती हैं दीपक बुझे जा रहे हैं बेताब हुए जा रहे हैं हवाये ठंडी हो गयी मौसम में नमी हो गयी तुम  अब खवाबो में खो जाओ सितारों ...

हर दफा

हर दफा बे नज़र किया जा रहा हूँ मैं, या तो हुनर नही हैं या समझ नही आ रहा हूँ मैं!

छन्द मुक्त कविता

हज़ारो की भीड़ में मिली थी वो बस ऐसे ही बात की तो अच्छा लगा, हालांकि उसका प्रथम वर्ष था तो मैंने उसे थोडा सहारा दिया उसका काम था फोटोग्राफी उसके अंदर एक ललक थी, उसकी बातो से लगता ...

तनहा जब भी गुज़रा फाकाकशी से...

देखो तो हम कहाँ से कहाँ पहुँच गए, खबर नही अपनी हम वहाँ पहुँच गए! जहाँ कहीं उसका पता मिला था हमे, अंजुमन से उठकर वहां वहां पहुच गए! ताबीर ढूंढते-ढूंढते थककर टूट गए, फिर ख़्वाब अपने ...