मुसलमानों को बस यह प्रण लेना है कि जिस मदरसे में AI नहीं सिखाया जा रहा वहां चंदा नहीं देंगे
भारत में मुसलमानो का मदरसा सिस्टम फीस से कम और चंदा से ज्यादा चलता है। एक अलिखित और अनौपचारिक नियम यह है कि
" हे मुसलमानों, हम मदरसा का देख रख करने वाले सभी उस्ताद तुम्हारे मुस्लिम समाज के गरीब बच्चों को खाना, रहना और शिक्षा देते है। यह बच्चे कल धार्मिक नेतृत्व को संभालेंगे और तुम्हारे लिए मस्जिदों में इमाम बनकर धर्म की खिदमत करेंगे। तुम अपना बच्चा तो धर्मगुरु बना नहीं रहे हो और इनके मां बाप, जो अभी गरीब है इनको कुछ भी बनाने की काबिलियत नहीं रखते, यदि ऐसा कुछ जेनरेशन चला तो तरावीह में कुरान पढ़ने वाला नहीं मिलेगा, मस्जिदों में इमाम नहीं मिलेगा और तुम सभी धार्मिक लिहाज से अनाथ हो जाओगे इसलिए तुम्हें चाहिए कि तुम इन बच्चों की फीस हमे दो हम इनको पढ़ाएंगे, लिखाएंगे, दीन की शिक्षा देंगे और समाज को धर्मगुरु देंगे"
यही एक कारण है कि मुसलमान इस देश में टैक्स के साथ मदरसे में चंदे भी देता है। मुझे इस सिस्टम से कोई दिक्कत नहीं है बल्कि जो ऐसा कर रहा है वह मेरे लिए बहुत एहतराम का मकाम रखता है अगर वह बच्चों को स्टैंडर्ड सुविधा के साथ रखता है। हम पिछले 70 साल देखे मदरसा का सिलेबस जिस हिसाब से अपडेट होना चाहिए था , उतना नहीं हुआ और इसकी वजह से बहुत सारे बच्चे इमाम ही बन पाए, इसके सिवा कोई और स्किलसेट लेकर नहीं उठे इसलिए वह इतने हो गए कि किसी भी सैलरी पर इमामत करने को मजबूर है और हम देखते है कि यहां सोशल मीडिया पर " इमाम की सैलरी ज्यादा करो" के पोस्ट लिखती, दिखती और पढ़ी जाती रहती है पर हम भूल गए कि जिस साल भारत सरकार CA का RESULT 100% कर देगी और 10 लाख बच्चे एक साल में iit से निकाल देगी तो भारत में CA और इंजीनियर भी अपनी मौजूदा वैल्यू खो देंगे। ऐसा हम जनरल इंजीनियर छात्रों के मामले में देख सकते है जहां 20 वेकेंसी के लिए 3000 इंजीनियर इंटरव्यू देने चले जाते है।
मेरी एक ही अपील है जनता से आपको मदरसा को चंदा देना है तो दीजिए लेकिन उससे पूछिए क्या वह बालक को कम्प्यूटिंग, डेटा साइंस, AI, रोबोटिक्स सिखा रहे है या नहीं। अगर नहीं तो आप उस मदरसे को दीजिए जो सिखा रहा है या जो कुछ और भी सिखा रहा है। इसके लिए आप मौलाना अजमल इंस्टीट्यूट, शाहीन इंस्टिट्यूट, वली रहमानी या दक्षिण के मदरसे में जाइए और वहां पूछिए कौनसा बालक ऐसा है जिसके नाम का मैं धन चंदा कर दूं तो कल वह deepseek जैसा कुछ बनकर बड़ों बड़ों को हिला सकता है।
चीन द्वारा पिछले 30 साल में अमेरिका को टेक में ऐसी टक्कर देना हमे यह सीख देता है कि अगर ऐसा चीन के सरकारी स्कूल का छात्र कर सकता है तो फिर हमारे मदरसे का छात्र ऐसा न कर सके इसका 10% तो कर ही सकता है। यह high time है सिलेबस में बदलाव करवाने का , ai के अलावा जो दूसरी फ्यूचर की स्किल है वह है वैल्थ मैनेजमेंट, कोई मदरसा यह भी सिखा रहा है तो सारा चंदा दे आइए बिना देखे वह किस मसलक का है।
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