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Showing posts from April, 2018

ये नहीं हैं के सुनता नहीं हूँ मैं।

ये नहीं है के सुनता नहीं हूँ मैं, बस कुछ बोलता नहीं हूँ मैं हैं तुझमे लाख ख़ामियां पर, उनपे कुछ कहता नहीं हूँ मैं! जो आ रहा कुचलता जा रहा, देखके चलो, रस्ता नहीं हूँ मैं! खुदी से मिर...

चांदनी का रंग।

काश ऐसा ही होता सबकी जिंदगी का रंग, जितना दिलकश हैं आज रौशनी का रंग! चाँद पुरजोर होके आसमाँ पर निकला, बिखर गया हैं जमाने में चांदनी का रंग!

आज की ग़ज़ल

ग़ज़ल की प्रचलित बहरें 1. बहरे कामिल मुसम्मन सालिम मुतफ़ाइलुन मुतफ़ाइलुन मुतफ़ाइलुन मुतफ़ाइलुन 11212 11212 11212 11212 ये चमन ही अपना वुजूद है इसे छोड़ने की भी सोच मत नहीं तो बताएँगे कल को क्य...

बादे-नौ-बहार चली, आ गयी हैं अब होली

बाद-ए-नौ-बहार चली आ गयी हैं अब होली, खिली हैं हर एक कली आ गयी हैं अब होली सभी लोग मस्त हैं, अब नाचते हैं गाते हैं तुम भी झूमो अपनी गली आ गयी हैं अब होली रंग भी बिखरते हैं, बिखरते हैं ...

तनहा

इश्क़ में हैं गुज़रे हम तेरे शहर से तनहा, महब्बत के उजड़े हुए घर से तनहा! हम वो हैं जो जीये जिंदगी भर से तनहा, और महशर में भी जायेंगे दहर से तनहा! तख़्लीक़े-शेर क्या बताऊ कितना गराँ है...

वज़ीरे-आज़म के लिए चार मिसरे।

एक मतला और एक शेर देखे। पैसे  को  खाने  के लिए तैयार मंत्री, तख़्त  पर बैठे है सब भ्रष्टाचार मंत्री, हाथो में हैं जिसके वतन की आबरू, वो प्रधानमंत्री नहीं वो हैं प्रचार मंत्री! ...

साहब की हवाई सैर पर एक मतला और एक शेर देखे।

कू-ए-वतन  में  उड़न  तश्तरी  मोड़िये  ना, साहब विदेश  घूमने की  जिद छोड़िये  ना! इंसाफ दिलाके आसिफा की रूह को फिर, अनशन स्वाति  मालिवाल का  तोड़िए ना! तारिक़ अज़ीम 'तनहा'

जिंदगी की तल्खियों पर तारिक़ अज़ीम 'तनहा' का कलाम पढ़े।

सोज़िशे-दयार से निकल जाना चाहता हूँ, हयात से अदल में बदल जाना चाहता हूँ! तन्हाई ए उफ़ुक़ पे मिजगां को साथ लेके, मेहरो-माह के साथ चल जाना चाहता हूँ! आतिशे-ए-गुज़रगाह-ए-चमन से हटकर, खुन...

Kiran Kher Replies that Rape is an part of our culture

सब अहले-हिन्द उनकी बात पर गुस्सा हैं, आज छपा अखबार में जिनका किस्सा हैं! हम चाहे भी तो बदल  नहीं सकते इसको, वो कहते हैं  ज़िना तहज़ीब का हिस्सा हैं! ज़िना-Rape, तहज़ीब- Culture तारिक़ अज़ीम 'तनहा'

मयस्सर कहाँ है....

मयस्सर कहाँ हैं सूरते-हमवार देखना, तमन्ना हैं दिल की बस एक बार देखना! किसी भी सूरत वो बख्शा ना जायेगा, गर्दन पे चलेगी हैवान के तलवार देखना! सज़ा ए मौत को जिनकी मुत्ताहिद हुए है...

अपने चेहरे पे।

अपने चेहरे पे जुल्फों को पड़ा रहने दो, रौशनी गर्दिशों में और अँधेरा रहने दो! चाँद खुद भी शर्मायेगा देखकर तुमको, कम से कम आँखों को ही खुला रहने दो मुझ दुश्मन से मिलो तो रौनक के स...

चाँद खूबसूरत...

देखो तो हम कहाँ से कहाँ पहुँच गए, खबर नही अपनी हम वहाँ पहुँच गए! जहाँ कहीं उसका पता मिला था हमे, अंजुमन से उठकर वहां वहां पहुच गए! ताबीर ढूंढते-ढूंढते थककर टूट गए, फिर ख़्वाब अपने ...