Skip to main content

Posts

Showing posts from February, 2018

तेरी नफरत में।

तेरी नफरत में उजड़ने को जी चाहता है मत पुछ मेरा जी क्या क्या चाहता हैं इन गमो के लम्हों से हैं मौत बेहतर अब तो मेरा मर मिटने को जी चाहता है दिल हैं बैचैन आज , क्या करू इसका शायद य...

हम उन्हें अपने दिल में....

हम उन्हें अपने दिल में बसाने लगे हैं, वो मेरे जिस्म में फिर से समाने लगे हैं! हो रही रोशन मेरे दिल की हर गली, वो मुझे टूट के फिर याद आने लगे हैं। फ़क़त चला गया तू तो, तड़पे हम थे, की तुझ...

कभी शोला तो कभी अंगार हूँ मैं।

कभी शोला तो कभी अंगार हु मैं, कभी शहंशाह तो कभी लाचार हूँ मैं! दोस्त चाहे मांग ले मेरी चलती साँसे दोस्ती, पर जां लुटाने को तैयार हूँ मैं! बुनता रहता हूँ हर मौसम में ग़ज़लें, कभी श...
सारी उम्मीदों को रोता छोड़ जाऊंगा इश्क़ से मैं रिश्ता तोड़ कर जाऊंगा यकीन हैं मुझको फिर भी हैं वहशत मना उसने कर दिया तो मर जाऊंगा उठेगी मय्यत तो घर के सामने से गुज़रेगी तेरे ये आ...
वक़्त के साथ हालात बदल भी जाते हैं फिर ऐसे ही लोग बदल भी जाते हैं जिनके होंठो से बरसते हैं फूल जाने क्यों उनके लहज़े बदल भी जाते हैं किया इंतज़ार शब-ऐ-उल्फत में भी उनका आये नहीं मा...
दर्द होता हैं बहुत जब किसी धर्म का अपमान हो इससे फ़र्क़ नहीं पड़ता हिन्दू हो या मुस्लमान हो ना आओ राजनीति के चंगुल में, खत्म हो जाओगे एक दिन तुम दोनों ही भाई मेरे भारत के निगहबान ...
वक़्त के साथ हालात बदल भी जाते हैं फिर ऐसे ही लोग बदल भी जाते हैं जिनके होंठो से बरसते हैं फूल जाने क्यों उनके लहज़े बदल भी जाते हैं किया इंतज़ार शब-ऐ-उल्फत में भी उनका आये नहीं मा...
रात भर तेरी यादो से दिल को जलाता रहा रात भर बहते अश्क़ो की मालाये बनाता रहा बेरुखी सिर्फ मुझसे, मुलाकाते गैरो के साथ तेरी बेवफाई की कड़िया रात भर मिलाता रहा किस्मत आज़माती है, स...
मत पूछिये हमसे नज़ाकत उनकी अज़ीब हैं प्यार की रिवायत उनकी नज़रो से किया क़त्ल, मरने ना दिया दुनिया ने कहा ये हैं शराफत उनकी बेहद सताते हैं वो मुझे खवाबो में भी बढ़ती ही जा रही हैं ह...
मुस्कुरा कर मिली थी हमे जिंदगी फिर क्यों बस गयी में ये नमी हालातो ने कर दिया हमे भी जुदा सहमी सहमी सी मेरे दिल की गली आ तो जा के निकलती ये जा मेरी इस रूह को तलाश हैं सिर्फ तेरी क्...
मुलाकात हुई तो हैं उनसे अलग सी, जुदा सी, जब नज़रे उठी हमारी, उन्होंने अपनी आँखों को पलकों में छुपा लिया हँसते हैं दुनिया के लोग मेरी हलात को देखकर मेरी बद्दुआ हैं की तुम्हे भी इ...
तेरा जिस्म हैं मानिन्दे मलबूसे हरीर हो गए हैं अब हम तेरे इश्के असीर जो राब्ता ना थे पहले मुहब्बत से आशना वो हैं अब सल्तनत ए वज़ीर चमन जारो में ना गुनगुनाया कर खीचे आते हैं जैस...
जवाब कुछ हो तेरा मेरी जिंदगी की खातिर हा गर हो तो ठहर जाऊंगा, ना हुई तो मर जाऊंगा
जब थका हारा आता हूँ घर तू अपने आँचल का सहारा देती है मिट जाती हैं मेरी थकाने जब माँ मुझे अपने आँचल में सुला देती हैं
सोच सोचकर उस लम्हे को मुस्कुराता हु मैं जिस पल तुमने इज़हार-ऐ-इश्क़ किया था डूब रहा हु, बचा लो सनम एक बार मुझे मुझे चाहने का कोई सबूत तो दो।
जब उतर ही गया इश्क़-ऐ-दरिया में, तो डूबने से क्यों डर रहा हूँ पता हैं मुझको ये इश्क़ जान ले लेगा फिर भी तुझसे मुहब्बत कर रहा हूँ बेरुखी बेइंतेहा, देखना भी उनका हमे गवारा नहीं जाने ...
दिल है आईना-ए-हैरत से दो-चार आज की रात ग़म-ए-दौरां में है अक्स-ए-ग़म-ए-यार आज की रात ग़म-ए-दौरां=शोक का समय; अक्स-ए-ग़म-ए-यार=प्रेमी के शोक की छवि आतिश-ए-गुल को दामन से हवा देती है दीदनी है र...
दीप तुम भी जलाओ, हम भी जलायेंगे मुस्कुराओ तुम भी, हम भी मुस्करायेंगे गरीब हो तो क्या, त्यौहार भी तो हैं हमारे पास मिठाई हैं, मिल बाँटकर खाएंगे शाम कितनी हसीं हो जायेगी उस वक़्त ...
बुझते हुओ को संभाला जा रहा हैं दीये में अब घी को डाला जा रहा हैं जो जमीं फ़क़त हैं चश्मे-मुश्के-गुबार चर्चे हैं वहां सोना निकाला जा रहा हैं जवाँ होंगे शज़र ताक़त से भी अब कमज़र्फ़ को ...
मै ऐब ओ हुनर छुपाता फिरता हूँ कुऐ यार में ठोकरे खाता फिरता हूँ जो दुसरे लोगो को बताते हैं औकात मैं उनकी औकात बताता फिरता हूँ हक़ीक़त में ना हो अगरचे हो वजूद ख्वाब सर्फ़ मिज़्गाँ ...

Aakhiri Baar Tera Aashiyana

आखिरी बार तेरा आशियाना देख रहा हूँ, मुहब्बत का खत्म ये फ़साना देख रहा हूँ! तेरी यादे ही मिट जाए इस तरह से, सामने अपने एक मैख़ाना देख रहा हूँ! बड़ी जालिम दुनिया हैं जुदा कर दिया हमे. ...

जॉन अलिया

जौन एलिया दिल्ली की एक कंपनी में बिना रेज्यूमे लिए इंटरव्यू देने पहुंच गए, फिर उसके बाद क्या हुआ, पढिए. एचआर- Tell me about yourself. जौन एलिया- तुम कौन हो यह ख़ुद भी नहीं जानती हो तुम मैं कौन हूं, यह ...

गुलजार साहब।

जिहाल-ए -मिस्कीन मकुन ब-रंजिश..... बेहाल-ए -हिजरा बेचारा दिल है सुनाई देती है जिसकी धड़कन , तुम्हारा दिल या हमारा दिल है.. गुलज़ार साहब का लिखा फ़िल्म गुलामी का ये गीत अधिकांश लोगों क...

बजट 2018

कैसा बना रहे हो बजट का आधार साहब जी, अमीर मजे में, गरीबो पर अत्याचार साहब जी! रोता भी हूँ, कभी मन ही मन में हंस पडता हूँ, ख़ुशी का मुझसे नहीं हो रहा इज़हार साहब जी!