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सिलसिला देखिये

खुशबुओं से घुली हैं हवा देखिये,
कितनी महकी हुई हैं फ़िज़ा देखिये।

मर मिटे कितने लोग इश्क़ में,
चल रहा ये हैं सिलसिला देखिये!

तारिक़ अज़ीम 'तनहा'

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