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Raat Hai Izteraab Ki Chadar

आग में हम  झुलस गए इतने ओढ़ ली  फिर  अज़ाब  की  चादर एक  मंज़र मैं  सिमटे हम दोनो तान कर इन्त्साब की चादर मेरे जोगी अभी  तु  धीरे  बोल तानी है  मैने  ख़्वाब की चादर तुम मुझे आईने से  लगते हो जैसे  होती है आब  की  चादर मसख़रे पन  से  बाज़  आ जाओं ज़िन्दगी  है  हबाब  की  चादर रूह  ने  जिस्म ओढ़  रक्खा  है अब  चढाओ  गुलाब की  चादर   رات ہے اضطـــراب کی چادر جیسے صحرا سراب کی چادر آگ میں ہم جھــلس گئے  اتنے اوڑھلی پھــــر عذاب کی چادر ایک منظر میں سمٹے ہم دونوں تان کر انتســـــــــاب کی چادر میرے جوگی  ابھی تو دھیرے بول تانی ہے میں نے خواب کی چادر تم مجھـے آئنہ سے لگتے ہـو جیسے ہوتی ہے آب کی چادر مسخــرے پن سے باز آ جـاؤ زندگی ہے حبــــاب کی چادر روح نے جسم اوڑھ رکّھا ہے اب چَــــڑھـاؤ گلاب کی چادر

आया कहाँ से था वो

आया कहाँ से था वो और किधर वो गया था, वो शख़्स जिस्मे-वक़्त पर मानिंदे-हवा था। होता है क्या मक़तलों में सब देख रहा था, मैं अपने जिस्म से निकलके कुछ दूर खड़ा था। सबका यहाँ पे इश्क़ अलहदा है जाँ-बा-जाँ, तुम्हें इश्क़ कोई और हमें कुछ और हुआ था। वो कौन था जो मुझमें बिछड़ गया है आज, वो कौन था जो मुझमें मानिंदे-क़ज़ा था। बहने लगा वो आँख से चश्मों की तरह फिर, जो अश्क़ मेरी पलकों पे कई रोज़ रुका था। कुछ भी नहीं है यहाँ हमें हासिल-ए-ज़िंदगी, बस माज़ी के दरीचों में कुछ ठहरा हुआ था। खुद पर न तारी कीजियो दौलत के दुःख हज़ार, हर शख़्स जहाने-फ़ानी से 'तनहा' गया था। तारिक़ अज़ीम 'तनहा'
  तो आप शाइरी सीखना चाहते हैं? अब ये कोई सिलेबस को पढ़ने की तरह सीधा सीधा काम होता तो हर साल शाइर झुँड में ग्रैजुएट होते। पर ऐसा भी नहीं कि ये इतना मुश्किल है। मुश्किल यहाँ शाइरी के नियम कतई नहीं हैं, बल्कि मुश्किलात नियम सीखने के बाद अपने अंदर शाइरी लाने की है। ज़्यादातर लोगों के अंदर शाइरी जाना ही नहीं चाहती। ऐसा इसलिए क्यूँकि वो अकेले नहीं जी सकते, वो अपने आप से बाहर दुनिया नहीं देख सकते, ज़्यादातर लोग बस लोग होते हैं, शाइर नहीं। हर आदमी जिसको ये लगता है कि उसके लिए सबसे ज़रूरी आदमी वो खु़द है, वो कभी शाइरी नहीं कर सकता। न ही वो कर सकता है जिसे आज तक मालूम ही नहीं चला कि उसे महसूस होता क्या है और क्या नहीं। कुछ ऐसे भी लोग हैं जिन्होंने शाइरी के नियम तो जान लिए पर शाइरी की समझ कभी न पा सके। पर उन्होंने हार नहीं मानी, वो शेर कहते रहे। मुझे ऐसे लोग निहाँ फिज़ूल लगते हैं। अगर आपको पता चलता है कि आप कभी शाइर नहीं हो सकते तो क्यों मानव जाति का वक्त बर्बाद कर रहे हैं, हराम की ज़िन्दगी की तलब़ क्यों है आपको। जाइए कुछ और रोज़गार देखिए।  खैर जिन लोगों को ये जानना है कि शाइरी कब की जा...

69 Nations Released Stamps On Gandhi

डाक विभाग के अतिरिक्त महानिदेशक (एडीजी) विश्व पवन पति ने कहा कि दुनिया के 69 देशों ने महात्मा गांधी की 150वीं जयंती के उपलक्ष्य में डाक टिकट जारी किए हैं।  "नौ और देश महात्मा गांधी पर डाक टिकट जारी करेंगे।" पति शनिवार को टीएमए पाई कन्वेंशन सेंटर में डाक विभाग द्वारा आयोजित राज्य स्तरीय डाक टिकट संग्रह कर्णपेक्स 2019 में बोल रहे थे। फिलेटली सभी गतिविधियों के बीच सबसे अच्छा पास टाइम है।  किंग जॉर्ज पंचम अपने समय के उल्लेखनीय डाक टिकट संग्रहकर्ताओं में से एक थे। डाक टिकट संग्रह केवल डाक टिकटों का संग्रह नहीं है।  उन्होंने कहा कि यह देश के भौतिक-सांस्कृतिक पहलुओं को प्रस्तुत करता है  डाक टिकट संग्रह के महत्व पर प्रकाश डालते हुए, पाटी ने कहा कि सीबीएसई ने छात्रों को शौक में लाने के लिए अपनी राजनीति विज्ञान की पाठ्यपुस्तकों में से एक के रूप में डाक टिकट संग्रह को पेश किया था।  महात्मा गांधी की 150वीं जयंती के अवसर पर "राष्ट्रपिता" पर पहला अष्टकोणीय डाक टिकट जारी किया गया। उन्होंने कहा कि यह नवोन्मेषी डाक टिकट इस मायने में अनूठा है कि यह गांधीजी के जीवन और गतिविधियों क...

उर्दू तुकांत शब्द भाग 1

  अक़्ल   = बुद्धि, तर्क, ज्ञान, मति, प्रज्ञा, मस्तिष्क, ज्ञान, अकबर  = सबसे महान, महानतम, महत्तम, अकसर  = अधिकतर, बहुत बार, बहुधा, विशेषकर, प्रायः, लगभग, सदा, सर्वदा, अख्ज़  = पकड़नेवाला, लेनेवाला, छीनने वाला, लोभी अख़बार  = समाचार, समाचारपत्र, वृत्तपत्र, वर्तमान पत्र, सामयिक पत्र, अगर  = यदि, तथापि, अग्यार  = अजनबी, प्रतिद्वन्दी (गै़र का बहुवचन) अगल़ात  = अशुद्धियां (गल़त का बहुवचन) अर्जमन्द  = महान अऱ्ज  = धरती, क्षेत्र, पृथ्वी अजनबी  = आगंतुक, विदेशी, परदेसी, अपरिचित, अज़ल  = अनन्तकाल, सनातनत्व, नित्यता अजब  = कौतुक, आश्चर्य, असाधारण, अजीब  = आश्चर्यजनक, अद्भुत, निराला अज़ाब  = पीड़ा, सन्ताप, दंड अज़ीज़  = प्रिय, माननीय, आदरणीय, गुणवान अज़ीम  = महान, विशाल, उच्च मर्यादा वाला अटक  =विघ्न, बाधा अत्त्फ़ाल  = बच्चे, संतति (तिफ़्ल का बहुवचन), संतान, पुत्र-पुत्रियाँ, अत्फ़  = दया, भेंट, प्रेम, कृपा अदा  = ऋण चुकाना, अदा  = मनोहरता, श्रृंगार, सुन्दरता, अभिनय, अदीब  = विद्...