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Showing posts from March, 2017

طارق عظیم تنہا . mohd tariq azeem biography

फरवरी 10, 1996 को पैदा हुए मौ. तारिक़ अज़ीम गौर को आज तारिक़ अज़ीम 'तनहा' के नाम भी जाना जाता हैं। इनका जन्म गांव बन्हेड़ा टांडा जो की रुड़की के अत्यंत समीप हैं वहां हुआ। इनके पिता एक संघर्ष...

Urdu Poetry In Hindi

इन रिन्दों की खुशफहमी को हवा दे दे, इन्हें चाहे शराब न दे मगर शीशा दे दे। हमे आदत हैं तेरी निग़ाहों से पीने की , सब शराबियो को उठाके मैख़ाना दे दे! गर तुझसे मुहब्बत करके गुनाह किय...

दास्तान-ए-तनहा

वादा निभाएंगे कोई जबाने-बदल थोडाई हैं, ये मज़ार-ए-'तनहा' हैं ताजमहल थोडाई है! फूंकूँगा मैं इसमें अपनी जान और लहू दोनों, एक किताब लिखूंगा कोई ग़ज़ल थोडाई हैं!

तुझे भी हूरो-गिलमा

चेहरे पर हँसी हैं, मगर बेज़ार हैं तू क्यों, लहज़ा संग दिल,कभी तलवार हैं तू क्यों! हिज़रते-आशियाँ ओ सफ़र-ए-जिंदगी, वक़्त -ए -हिज़्र  में     बेदार  हैं तू  क्यों! तू छोड़ गए तुझ को गर्दिश- ऐ...

कश्ती मेरी....

   तूफ़ान भी करने लगा मेरी अज़्म का तवाफ़, इसे किसने बताया की कश्ती मेरी शिकस्ता हैं! गरचे पैहम हम लिखते रहे 'तनहा' तो एक दिन बहर में भी लिखेंगे तारिक अज़ीम 'तनहा'

दिल का हाल....

ना सुना किसी को यहाँ अपने दिल का हाल 'तनहा'            बस ये समझ ले के ये दौर गूंगे-बहरो का है        ***********%%%%%***********

ग़ज़ल लहू मांगती हैं।

ग़ज़ल- मेरा नज़रिया फ़ारसी के ये भारी भरकम शब्द जैसे फ़ाइलातुन, मसतफ़ाइलुन या तमाम बहरों के नाम आप को याद करने की ज़रूरत नही है.ये सब उबाऊ है इसे दिलचस्प बनाने की कोशिश करनी है. आप स...

कोई नहीं अब हमदम अपना।

कोई नहीं अब हमदम अपना, किसे कहु अब सनम  अपना! अपनी अदाये जो याद नहीं, बिना मतलब हैं जनम अपना! साये से भी डर जाते हैं अब, इतना बढ़ चुका वहम अपना! दुश्मन हमे देख राह छोड़ देते, ऐसा हैं अ...

आओ आओ ऐ चाँद सितारों तुम्हारा इस्तक़बाल हैं....

आओ आओ ऐ चाँद सितारों तुम्हारा इस्तक़बाल हैं, तुम भीआओ तीरगी के मारोतुम्हारा इस्तक़बाल हैं! दस्तक देने लगी फ़िज़ाएं,बारिशे,और सरसब्ज़, गुलशन में ऐ कुदरतीनज़ारो तुम्हारा इस्तक़ब...

सुना हैं वो....

सूना हैं वो तुमसे मिलते हैं हमसे भी एक दफा मिलाओ तो सही! मैंने बनायीं है अपने लहू से तस्वीर उनकी, इतनी महब्बत हैं उनसे बताओ तो सही! तारिक़ अज़ीम तनहा

पहाड़ो से....

पहाड़ो से कूच कर जाने को जी चाहता हैं, ऐसी तन्हाई में मर जाने को जी चाहता हैं! हूँ घर से कई कोस दूर  मालूम हैं  मुझको, शामहोती हैं तो घरजाने को जी चाहता है! गज़ले, गीत, और कुछ शेर मैं  ...

नज़र से मुझको....

नज़र से मुझको पिला दे साकी, नज़र मिरी तरफ उठा दे साकी! होगी कई शीशे की मय नज़र में, जानूंगा गर इनमे डूबा दे साकी! रंजो-गम का हैं बोझ  दिल पर, अलम मिरे सारे मिटा दे साकी! झगड़ो से कुछ भी न...

नज़र से मुझको....

नज़र से मुझको पिला दे साकी, नज़र मिरी तरफ उठा दे साकी! होगी कई शीशे की मय नज़र में, जानूंगा गर इनमे डूबा दे साकी! रंजो-गम का हैं बोझ  दिल पर, अलम मिरे सारे मिटा दे साकी! झगड़ो से कुछ भी न...

कालीपद प्रसाद

                                होली !! आओ प्रिये तुम्हे गुलाल लगा दूँ...कि आज होली है . सात रंगों से रंग दूँ तुम्हे... कि आज होली है| तन पर उगता रवि का लाल लगाऊं... कि आज होली है मन में अ...

कैलाश हॉस्टल GBPEC GHURDAURI Pauri Garhwal

सबको रंग लगाओ के होली आ गयी, कैलाश को सजाओ के होली आ गयी! भीगा दो आज सबका तन-मन रंग से, गुलाल लेकर आओ के होली आ गयी! जो आज भी रो रहा कोने में   बैठकर, उसे भी गले लगाओ के होली आ गयी! गिले-...

Betiyon ke naam ek sandesh

भीगी पलकों से तेरी राह तके हैं सारे लौट के घर को आजा तेरा आँगन तुझे पुकारे मैंने सदियों की इज्जत पल भर में तभी गंवाई जब दुनिया ने देखी मेरी सूनी पड़ी कलाई बिन तेरे इन त्यौहार...

Chand se....

दिल अपना यूँ चाँद से जुदा रखा हैं, जो मेरे घर  में जलता दीया रखा हैं! दुनियाउसे क्यू तुली है शेरकहने पे, जिसने खुद का नाम  गधा रखा हैं! जो फिरता आईना दिखता सबको, हमने उसे भी आईना ...

उर्दू में छंद मुक्त कविता।

मैं तो हूँ ही तिफ्ले-नादाँ, इल्मे-कलम कहाँ, लेकिन हक़ीक़त ये भी है की जिन लम्हात की ये चश्म तस्वीर बना ले उन्हें दिल से ज़ुबाँ, और ज़ुबाँ से लफ्ज़ देने से मैंने कभी तक़ल्लुफ़ नही किया...

रंग

यूँ फेंककर रंग आसमान की तरफ, आसमान को रंगीन किया हैं हमने! 'तनहा' तारिक़

मरहले और भी हैं.....

खत्म हुए या जिंदगी के रास्ते और भी है, हम ने देखे है जीस्त के मरहले और भी है! वो दौरे-इश्क़ और था जो मांगता था लहू, अबतो खून से भी जिस्म सस्ते और भी है! जुलेका लाएगी युसूफ को बाजारे-मिस्र से,               खरीद  ही लेगी नूर  को सिक्के और भी हैं! मुब्तिला-ए-तन्हाई का ही फक्र नही मुझे,                गमें-दर्दो-अलम से मेरे रिश्ते और भी हैं! ज़माना भी शायरी-ए-तनहा पढ़ने लगा,                 वरना सुख़नवर यहाँ लिखते और भी हैं! कलम हमारा कागज़ तक ही महदूद नहीं,                   इसे लगाके शेरवानी पे हम सजते और भी हैं! तारिक़ अज़ीम 'तनहा'

जाम.....

!!.."जाम का शीशा हाथो में देख शराबी ना समझ"..!! !!.."हर वो शख्स जो मस्जिद से निकले नमाजी नही होता"..!!

खवाब पर आती नहीं अब...

नींद गिरिया ए बाब पर आती नही अब, आ  जाए तो खवाब पर  आती नहीं अब! गिरिया; आँख,  बाब; दरवाज़ा सीरत को तरजीह देता हूँ सूरत को नहीं, नज़र हुस्नो-शबाब पर आती नहीं अब! आँखे मोबाइल की तलबगार ...