Skip to main content

Posts

Israel- Palestine Conflict

अरब इसराइल के बीच जंगों का हाल पढ़िए ऐसा नहीं है कि अरब सिर्फ हारे हैं अरबों ने जीत भी दर्ज की है जैसे 1948 में जब जंग शुरू हुई तो शुरू में अरबों का पलड़ा भारी था छह हजार से ज्यादा इसराइली मारे गए थे , 1968 में इसराइल ने जार्डन पर हमला किया और पंद्रह घंटों में ही 250 सैनिकों की हत्या और 400 सैनिकों के घायल होने से घबराकर समझौता करके भागा  1973 की जंग में भी मिस्र की कब्जा की हुई जमीन छोड़नी पड़ी  लेकिन बड़े रेफरियों ने अरबों को अपनी जीत का फायदा उठाने नहीं दिया जबकि इसराइल ने जिन क्षेत्रों पर कब्ज़ा किया उसे संयुक्त राष्ट्र संघ भी खाली नहीं करा सका. आप के पास पावर न हो तो आप जीत का भी फायदा नहीं उठा सकते. 1920 में फ़िलीस्तीन ब्रिटिश मैंन्डेट का हिस्सा बन गया यानि एक तरह से ब्रिटिश कालोनी बन गया उसके बाद से ब्रिटिश अफ़सरों की मदद से फ़िलीस्तीन में‌ दुनिया भर से यहूदी आकर बसने लगा शुरू में तो अरबों ने खास विरोध नहीं किया लेकिन धीरे धीरे जब यहूदियों की कालोनियां बसने लगी तो अरबों का विरोध शुरू हुआ जिसके लीडर थे शैख इज़्ज़दीन अब्दुल क़ादिर अल क़ासम ,शैख को ब्रिटिश यहूदी पुलिस ने श...

पितृसत्तामक समाज पर लानत

के इस दौर में एक संकट बड़ा गहराया है, सभी साथी पढ़े और ऐसे लोगो की मदद करे क्योकि ये वाक़या आज मेरे साथ पेश आया है और ये एक सच्ची दास्तान है। एक परिवार में पति पत्नी और उनकी एक बेटी थी तो हुआ ये की 2009 में उस हँसते खेलते परिवार में उस पत्नी के पति की मृत्यु हो जाती है और फिर उस माँ और बेटी पर जो कहर साली का पहाड़ टूटा जो गुरबत की बेड़िया गिरी उसकी कैफ़ियत मैं शायद बयान भी न कर पाऊं, उस औरत के पति ने जो कुछ कमाया था वो कुछ महीने कुछ हफ़्ते तक तो उनकी जरूरतें पूरी करता रहा मगर उनके ज़िन्दगी भर के ख़र्चे के लिये काफी नहीं था। बेटी की मां ने अपनी बच्ची की परवरिश के लिए अपने भाई और पिताजी के घर की तरफ़ रुख किया, बेटी की माँ अपने भाईयों और बाप के ताने सुनती थी उसके भाई कहते थे कि अपने पति के घर जा मगर वह असहाय थी बच्ची छोटी थी उसकी परवरिश को लेकर बेचारी माँ ने ये सोचकर अपने ननिहाल का रुख किया था कि शायद मेरे भाई मेरी मदद करेंगे क्योंकि वो सब सरकारी नौकरी पर है मगर मैं थूकता इस पितृसत्ता वादी समाज पर जिसने उस औरत पर लगातार 10 साल ज़ुल्म के पहाड़ तोड़े उस बेचारी औरत और बेटी को अपने घर मे एक नौकर से गिरा ह...

फिल्मी गानों की तकती बहर पार्ट-1

फ़िल्मी गानों की तकती के कुछ उदाहरण ....           1222 1222 1222 1222                             ( hazaj musamman salim ) (१) -#बहारों फूल बरसाओ मेरा महबूब आया है |       -#किसी पत्थर की मूरत से महोब्बत का इरादा है       -#भरी दुनियां में आके दिल को समझाने कहाँ जाएँ       -#चलो इक बार फिर से अजनबी बन जाएँ हम दोनों       *ये मेरा प्रेम पत्र पढ़ कर , कि तुम नाराज न होना       -#कभी पलकों में आंसू हैं कभी लब पे शिकायत है |        -#  ख़ुदा भी आस्मां से जब ज़मीं पर देखता होगा        *ज़रा नज़रों से कह दो जी निशाना चूक न जाए |        *मुहब्बत ही न समझे वो जालिम प्यार क्या जाने |        *हजारों ख्वाहिशें इतनी कि हर ख्वाहि...

सारा शगुफ्ता Sara Shagufta

आज सारा शगुफ़्ता की विलादत का दिन है गुजरांवाला में पैदा हुयीं उन्हें पढ़ने लिखने का ख़ूब शौक़ था लेकिन इसके बावजूद मैट्रिक भी पास न कर सकीं उनकी सौतेली मां और  तीन मजीद शादियां जिनमें 2 शौहर शायर थे इन्हें ज़हनी अज़ीयत से मुब्तला कर दिया गया सारा लिखती हैं एक शाम शायर साहब ने कहा आप से ज़रूरी बात करनी है फिर एक रोज़ रेस्टोरेंट में मुलाक़ात हुई उसने कहा शादी करोगी दूसरी मुलाक़ात में शादी तय हो गयी अब काज़ी के लिए पैसे नहीं थे मैने कहा आधी फ़ीस तुम क़र्ज़ ले लो और आधी में चूंकि घर वाले शरीक़ नहीं होंगे मेरी तरफ़ से गवाह भी लेते आना एक दोस्त से मैने उधार कपड़े मांगे और मुकर्रर जगह पर पहुंची और निकाह हो गया काज़ी साहब ने फ़ीस के अलावा मिठाई का डब्बा भी मंगवा लिया तो हमारे पास कुल छ: रुपए बचे में लालटेन की रोशनी में घूंघट काढ़े बैठी थी शायर ने कहा दो रुपए होंगे बाहिर मेरे दोस्त ग़ैर किराए के बैठे होंगे मैने दो रुपए दे दिए और फिर कहा हमारे यहां बीवी नौकरी नहीं करती नौकरी से भी हाथ धोए घर में रोज़ तरीन याफ्ता शायर और नक़्क़ाद आए और एलियट की तरह बोलते और कम अज़ कम मेरे ख़मीर में इल्म की व...

Sahir Ludhiyanavi साहिर लुधियानवी

आज मेरे पसंदीदा गीतकार साहिर साहब की पुण्यतिथि है , साहिर वाक़ई क़लम के साहिर थे वैसे उन्होंने कई नग़्में दिए पर अगर सिर्फ़ में  दो गीत कहूं "तू हिंदू बनेगा न मुसलमान बनेगा जिसे रफ़ी साहब ने स्वर दिया है और दूसरा औरत की पीड़ा को उन्होंने जिस तरह 50 के दशक में बयां किया है औरत ने जन्म दिया मर्दों को" ये दिए होते तो भी साहिर मेरे पसंदीदा गीतकार होते ! चलो फिर अजनबी बन जाएं ,तेरी दुनिया में जीने से तो बेहतर है कि मर जाएं,हम ने सुना था एक है भारत ,वो सुबह कभी तो आएगी, ऐसे गीत या उनके द्वारा कहे गए भजन ईश्वर अल्लाह तेरो नाम या 60 के दशक में कहे गए भजन मन ही देवता, मन ही ईश्वर, मन से बड़ा न कोय इस तरह के भजन मुझे बहुत पसंद हैं या नज़्म परछाइयां  रोमांटिक शायर होने के साथ उन्होंने संजीदा शायरी भी की "कि कौन रोता है किसी और की खातिर ए दोस्त ,सबको अपनी ही किसी बात पे राना आ गया " इन्क़लाब भी उनके अंदर झलकता है 'हम अम्न चाहते हैं मगर ज़ुल्म के ख़िलाफ़ , गर जंग लाज़मी है तो फिर जंग ही सहीह'              जागीरदार का बेटा बचपन में पिता के साथ समझौता किया औ...