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मदरसा शिक्षा में AI और फ्यूचर स्किल्स की ज़रूरत

मुसलमानों को बस यह प्रण लेना है कि जिस मदरसे में AI नहीं सिखाया जा रहा वहां चंदा नहीं देंगे भारत में मुसलमानो का मदरसा सिस्टम फीस से कम और चंदा से ज्यादा चलता है। एक अलिखित और अनौपचारिक नियम यह है कि  " हे मुसलमानों, हम मदरसा का देख रख करने वाले सभी उस्ताद तुम्हारे मुस्लिम समाज के गरीब बच्चों को खाना, रहना और शिक्षा देते है। यह बच्चे कल धार्मिक नेतृत्व को संभालेंगे और तुम्हारे लिए मस्जिदों में इमाम बनकर धर्म की खिदमत करेंगे। तुम अपना बच्चा तो धर्मगुरु बना नहीं रहे हो और इनके मां बाप, जो अभी गरीब है इनको कुछ भी बनाने की काबिलियत नहीं रखते, यदि ऐसा कुछ जेनरेशन चला तो तरावीह में कुरान पढ़ने वाला नहीं मिलेगा, मस्जिदों में इमाम नहीं मिलेगा और तुम सभी धार्मिक लिहाज से अनाथ हो जाओगे इसलिए तुम्हें चाहिए कि तुम इन बच्चों की फीस हमे दो हम इनको पढ़ाएंगे, लिखाएंगे, दीन की शिक्षा देंगे और समाज को धर्मगुरु देंगे" यही एक कारण है कि मुसलमान इस देश में टैक्स के साथ मदरसे में चंदे भी देता है। मुझे इस सिस्टम से कोई दिक्कत नहीं है बल्कि जो ऐसा कर रहा है वह मेरे लिए बहुत एहतराम का मका...

फ़हमी साहिब की विरासत: शायरी के लहजे का अनमोल ख़ज़ाना Fehmi Badayuni RIP

मेरे हिस्से के फ़हमी साहिब  ============== दोस्तो: रात के दस बजा चाहते हैं, फ़हमी साहिब की अचानक वफात का दुःख पहले से ज़ियादः शिद्दत इख्तियार कर रहा है.... कम-ओ-बेश इसी वक़्त बात हो जाती थी हम दोनों में अक्सर रात को..फिलहाल इज़्तराब की कैफयत है, जब तक कुछ लिख न लूं , राहत न मिले गी.. फुर्सत से फिर किसी रोज़, आज बस इतना ही जो कुछ ज़ेहन में आ पा रहा है.. मुझे नहीं पता के फ़हमी साहिब आप में से किस किस के दोस्त थे? किस के कितने करीब थे? अलबत्ता मेरे बहुत करीब थे, बहुत जियादा करीब.. बड़ी clarity थी कुछ बातों को ले कर हमारे बीच..अक्सर इख्तालाफ भी होता था. लेकिन अपनी इल्मियत की धोंस ज़माने वाला इख्तिलाफ नहीं, जैसे तेसे लड़ते भिड़ते किसी एक नुक्ते पे पहुँचने वाला इख्तालाफ..शायद इसी अपनेपन और दावेदारी के तहत मैं खुल कर उन के अशआर पे अपनी ईमानदार राय देता था..  मैं अपने शेरों पे, उन का दिया हुआ मशवरा एक मिनट में मान लेता था, और वो मेरा मशवरा दस सेकंड में..मेरे कितने अशआर और मिसरों की सेहत फ़हमी साहिब ने दुर्रुस्त की..उन के कितने अशआर आप तक पहुँचने से पहले मेरी नज़र से गुज़ारे गए .. हम दोनों एक दुसरे क...