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रंगो का पर्व-होली...

सबको रंग लगाओ के होली आ गयी, कैलाश को सजाओ के होली आ गयी! भीगा दो आज सबका तन-मन रंग से, गुलाल लेकर आओ के होली आ गयी! जो आज भी रो रहा कोने में   बैठकर, उसे भी गले लगाओ के होली आ गयी! गिले-...

जो राज़ गहरे

जो राज़ गहरे दबाके बैठो हो उन्हें बता दूं तो क्या करोगे, सितम के किस्से जो सरे-महफ़िल मैं सुना दूँ तो क्या करोगे! हसद की बातें, दिलों में नफ़रत, रहेगी कब तक, चलेगा कब तक, उल्फ़त शम्मा दिलों में सबके जो मैं जला दूँ तो क्या करोगे! वफ़ा की बातें, मुहब्बत के किस्से न सुनाओ तुम ही तो है बेहतर जो लैपटॉप में है एक तस्वीर गर तुम्हें दिखा दूँ तो क्या करोगे! हुक़ूमत पे तबसिरे, करोगे कब तक ऐ लोगो तुम बोझ बनकर, मैं इंकिलाब की आमद तुम्हारें हाथों में गर थमा दूँ तो क्या करोगे। वर्दी-ओ-बन्दूक मासूमों पर जो तुम चलाते हो तो मेरी भी सुन लो, हुक़ूमत का बागी, 'तनहा' सो रहा है, जो उसे जगा दूँ तो क्या करोगे।

हर बार जैसा करता था ....

हर बार जैसा करता था वैसा नहीं किया, रुकने का मैंने उसको इशारा नहीं किया! हर सू दिखूंगा मैं ही जब इश्क़ तुमको होगा, अभी खुद को तुमने मेरा दीवाना नहीं किया! गुज़र जाऊंगा हद से तो हो जाऊंगा पागल, इश्क़ में मैंने खुद को यूँ रांझा नही किया! हमेशा रखी है लाज तेरी आन-बान की, मैंने कभी भी तेरा कहीं चर्चा नहीं किया! खुद हो गए रुसवा इस जहान-ए-फानी से, लेकिन कभी भी तुझको 'तनहा' नहीं किया! तारिक़ अज़ीम 'तनहा'

Baat Baat Pe Kasme

बात-बात पे क़समें खाने वाले लोग, अच्छे नही होते यक़ी दिलाने वाले लोग, टूटे, फूटे, बिखरे होते है वो अंदर से बहुत, बाहर से खुश नज़र आने वाले लोग! एक वो है के जिसने तुझको पा लिया, एक हम है...