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Showing posts from 2018

मज़बूरी में

मज़बूरी में बे-आबरू होके चमन से निकल जाती हैं, पैसे के लिए कोई कली पैराहन से निकल जाती हैं! मेरे  हमदम  तेरे  चेहरे  की  तासीर  ही  कुछ  ऐसी हैं, मुझे जो बात कहनी होती हैं जेहन से...

चमनज़ार तुम्हारे ही

चमनज़ार तुम्हारे ही तबस्सुम से शादाब होते हैं, देखके तुम्हें लगता हैं हँसने के भी आदाब होते हैं! सुबहे-दम मशगूल रहती है कुदरत भी इबादत में, कलिया सज़दे करती हैं शज़र के आदाब होत...

इश्क़ करती हो।

छिपकर शायरी पढ़ती हो, यक़ीनन इश्क़ करती हो! बाम पर आती हो क्यो, किसके लिए संवरती हो! क्लास में और भी सब हैं, मुझे क्यो देखा करती हो! लिखा मगर जाता नही, कोशिश बहुत करती हो! बस गयी हो इन आ...

नशा ए मुहब्बत

यादे तेरी सताती हैं हर पल और तेरे अत्याचार में हूँ फिर से कब जुल्म होगा मुझ पर बस इस इंतेज़ार हूँ, पिया करता हुँ इस तरह से मुहब्बत की शराब मैं, पहले मुहब्बत का नशा था अब बेवफाई क...

तआल्लुक़ इतना तो था।

मुहब्बत ना थी मगर ताआल्लुक़ इतना तो था, हँसकर कभी हमसे बात वो करता तो था! मेरी जान था वो, मैं उसे सितमगर नही कहता, और ये भी बात सच के वो बेवफा तो था, ये बात और के अब ताल्लुक़ भी नही उसस...

Na मालूम

मेरे जुनु का नतीजा ज़रूर निकलेगा इसी सियाह समुन्दर से नूर निकलेगा गिरा दिया है जो साहिल पर इंतज़ार ना कर अगर वो डूब गया तो दूर निकलेगा उसी का सहर वही मुद्दई वही मुंसिफ हमें यक...

उम्र गुज़र जाती हैं

उम्र   गुज़र जाती  हैं सँवरने में, जिंदगी में  कुछ  नया करने में! कहाँ  हैं  वो मज़ा जीने में यारो, जो  लुत्फ़  हैं  वतन पे मरने में! शायरी लिखना कोई खेल नही, उम्र  बीत  जाती हैं नि...

जवाब हैं वो।

क्या तुम्हे बताऊँ के कितना लाजवाब हैं वो, मेरे हर सवाल का आखिर जवाब हैं वो! यूँ तो सभी चीज़े ख़्वाब में रक़्स करती हैं, पर जो मयस्सर नही मुझे ऐसा ख़्वाब हैं वो! उसे देखता हूँ तो मदहो...

Na Aana Behtar Tha

ज़माने के रंगों से उतर जाना बेहतर था, जिंदा  रहने से  तो मर जाना बेहतर था! अब जाते हुए तुम दिल तोड़कर जाते हो, ऐसे आने से तो तेरा ना आना बेहतर था! tariq azeem tanha

Ulfat me insa'n

उल्फत में इंसा खुद अपना रहजन होवे। कमरे में अँधेरा कर इनकी तन्हाई रौशन होवे। रस्मे-दुनिया हैं की कोई खुश तो कोई नाशाद हो, उठ जाए जब महफ़िल तो तन्हाई आबाद हो। Tariq azeem tanha

इमरोज़ टुकड़ा

इमरोज़ टुकड़ा टुकड़ा हुआ हूँ मुहब्बत में, आईना हुआ करता था अभी कल की बात हैं! गुज़र रही हैं मेरी जिंदगी अब सहारे शराब के, पारसा हुआ करता था अभी कल की बात हैं! तारिक़ अज़ीम तन्हा

बारिशे

बारिशें  गर्दिशों  में हैं लेकिन दामन मेरा, भीग  गया  हैं फिर  मेरे आँसुओ से  ही!                                                तारिक़ अज़ीम 'तनहा'

रविश का लेख

रवीश का लेखः औरंगज़ेब जिसने आखिरी वक्त में कहा था ‘मैं अजनबी की तरह आया और अजनबी की तरह जा रहा हूं। औरंगज़ेब और आरक्षण। इससे ज़्यादा लिखने की कोई ज़रूरत नहीं है। इन दो शब्द...

नज़र से मारिए

उठाकर के पलके तिरछी नज़र से मारिए, आईनासाज़ हैं 'तनहा' उसे पत्थर से मारिए! बता दीजिये कैसे उसकी बेटी को लूटा, बताकर उसकी माँ को इस खबर से मारिए! ये हैं तरीका उसको बर्बाद करने का, उस...

Eid Mubarak

दूर अपने वतन से, माँ की नज़र से दूर ईद कैसी, परदेसी की ईद क्या, घर से दूर ईद कैसी! हम ना जा सके, करीब वो भी ना आ सके, तवीले-सफ़रे-चाँदे-दिलबर से दूर ईद कैसी! मंज़िल ही ईद हैं, ये रास्ते हैं ...

तक़ल्लुफ़

अंदर ही मकाँ के उसने मुझे रुखसत कर दिया! छोड़ने  का उसने  दर पे  तक़ल्लुफ़ नहीं किया, तारिक़ अज़ीम 'तनहा'

हर अपने सितम से मुझको

हर अपने सितम से मुझको दो-चार कर गया, नीलाम उल्फत में मुझे मेरा यार कर गया! मुफ़लिसी में कहाँ जोर बनाये वो ताज को, एक शाह हम ग़रीबो को शर्म-सार कर गया! अपनी अज़मत को झुकाया ना उसने कभी ...

मैं खुद ही अपनी मंज़िल हूँ....

मैं  खुद ही अपनी मंज़िल हूँ, और सफ़र भी मेरा मुझमे हैं! मैं कभी अकेले चलता नहीं हूँ, हमसफ़र भी मेरा मुझमे हैं! मैं  एक  महफ़िल  हूँ चलती फिरती, शोर शराबा मुझमे हैं, एक ख़ामोशी हूँ  तन्...

तन्हाई

उल्फत में इंसा खुद अपना रहजन होवे। कमरे में अँधेरा कर इनकी तन्हाई रौशन होवे। रस्मे-दुनिया हैं की कोई खुश तो कोई नाशाद हो, उठ जाए जब महफ़िल तो तन्हाई आबाद हो। तारिक़ अज़ीम 'तनहा'

सहने लगते हैं।

दुःख जब भी तेरा हम सहने लगते हैं, फिर इक नई ग़ज़ल हम कहने लगते हैं! जिन्दा दिली जब मर जाती हैं इंसा में, उदास फिर वो सरे-शाम रहने लगते हैं! जिस शब में उसकी याद आती हैं फिर, खून के अश्क़ ...

मक़ाम लिख दिया।

मन्ज़िललिखी,मेहनत लिखी,मक़ाम लिखदिया, जिंदगी की शोहरत का इंतज़ाम लिख दिया! फिर कहाँ वो धरते फिरते किसी के सर क़त्ल, लोगो ने मेरे सर ही कत्ले-इल्ज़ाम लिख दिया! खुद तू तो सोये चैन से, ...

जब मेरी याद आ रही होगी।

जब मेरी याद आ रही होगी, अक्स फिर मेरा बना रही होगी! इतना कहर ढाती हैं की मर जाऊ, जब वो बिंदिया लगा रही होगी! क्लास में कुछ दूर बैठकर के वो, मुझसे नज़रे मिला रही होगी! मुझसे एक शेर ना ...

पागल हो गया हूँ

शहर सा था कभी अब जंगल हो गया हूँ, खुशकिस्मती देखिये की पागल हो गया हूँ! गज़ले-मुमताज़ दफ़न हैं दिल की इमारत में, शहज़ादा शाहजहाँ का ताजमहल हो गया हूँ! गीत, ग़ज़लो से सभी पर प्यार लुटात...

मेरी भी शानो-शौकत की झोंपडी थी।

शहर सा था कभी अब जंगल हो गया हूँ, खुशकिस्मती देखिये की पागल हो गया हूँ! गज़ले-मुमताज़ दफ़न हैं दिल की इमारत में, शहज़ादा शाहजहाँ का ताजमहल हो गया हूँ! गीत, ग़ज़लो से सभी पर प्यार लुटात...

आली जनाब

जिगर पे फिर चोट खाना हो गया हैं, फिर दिल उनका निशाना हो गया हैं। मेरे सर झूठ मँढ़ने लगे वो कमबख्त, घर में एक बातिल-खाना हो गया हैं! अब जिंदगी का हैं यही मेरे मकसद, कातिलो को जिन्दा ...

यादो के आईने

यादो    के   आईने   में  तुझे   सुबहो-शाम  देखूँ, कहकर   तेरे  तस्सवुर   पे  मैं  भी  कलाम  देखूँ। घर    से    निकलके रोज़   जाता  हूँ   मैं  किधर, पीछा  अपना  करके वो मंज़िल-ओ...